भारतकोश
ईशादि नौ उपनिषद्

ईशादि नौ उपनिषद्

Ishadi Nau Upanishad

ऋषिगण द्वारा

स्रोत: Gita Press Gorakhpur · Gita Press Gorakhpur (उद्गम)

DevanagariHindipublished548 पृष्ठ

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( १४ )

मन्त्रविषयपृष्ठ
२-३निराकार परमेश्वरके स्वरूपका वर्णन तथा उससे साकार जगत्के सूक्ष्म तत्त्वोंकी उत्पत्तिका प्रकार ..... २४९२४९
४-५भगवान्के विराट्रूपका तथा प्रकारान्तरसे जगत्के उत्पत्ति-क्रमका वर्णन ..... २५०२५०
६-९परमेश्वरसे ही फलसहित यज्ञादि साधना, देवादि प्राणी और सदाचार आदि आध्यात्मिक वस्तुओंकी एवं पर्वत, नदी आदि बाह्य जगत्की उत्पत्तिका निरूपण ..... २५२२५२
१०परमेश्वरसे उत्पन्न समस्त भावोंको उन्हींका स्वरूप बताकर हृदयरूप गुहामें छिपे हुए उन अन्तर्गामी परमेश्वरको जाननेके फलका वर्णन ..... २५६२५६

( द्वितीय खण्ड )

‘गुहाचर’ नामसे प्रसिद्ध परमेश्वरके स्वरूपका वर्णन और उसे जाननेका आदेश ..... २५६२५६
२-४परब्रह्मके स्वरूपका निर्देश तथा धनुष और बाणके रूपकद्वारा परब्रह्मरूपी लक्ष्यको वेधनेका प्रकार ..... २५७२५७
५-८सबके आत्मरूप सर्वज्ञ परमेश्वरको जाननेके लिये अन्य सब बातोंको छोड़कर ध्यान करनेका आदेश तथा परमेश्वरके स्वरूपका वर्णन एवं उसको जाननेके फलका निरूपण ..... २५९२५९
९-११परब्रह्मके स्थान और स्वरूपका वर्णन, उन्हें जाननेका महत्त्व तथा उन स्वप्रकाश परमेश्वरकी सर्वप्रकाशकता और सर्वव्यापकताका कथन ..... २६२२६२

तृतीय मण्डक

( प्रथम खण्ड )

१-२एक वृक्षपर रहनेवाले दो पक्षीके रूपकद्वारा जीव और ईश्वरकी भिन्नताका निरूपण तथा ईश्वरकी महिमा जाननेसे जीवके मोहजनित शोककी निवृत्तिका कथन ..... २६५२६५
३-४परमेश्वरकी महिमाके दर्शनसे सर्वोत्तम समताकी प्राप्ति तथा उस ज्ञानी भक्तकी निरभिमानता और सर्वश्रेष्ठ स्थितिका वर्णन ..... २६६२६६
५-६सत्य, तप, ज्ञान और ब्रह्मचर्यके साधनसे परमात्माकी प्राप्तिका कथन तथा सत्यकी महिमा ..... २६८२६८