भारतकोश
जातक कथाएँ (पालि से प्रामाणिक हिन्दी अनुवाद)

जातक कथाएँ (पालि से प्रामाणिक हिन्दी अनुवाद)

भगवान बुद्ध / पालि त्रिपिटक द्वारा

स्रोत: जातक कथाएँ (पालि से प्रामाणिक हिन्दी अनुवाद) · हिन्दी साहित्य सम्मेलन, प्रयाग · 1956 (उद्गम)

DevanagariHindipublished479 पृष्ठ

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[ ११ ] विषय पृष्ठ १४२. सिगाल जातक .. .. .. .. १०८ [ गीदड़ों को मारने की इच्छा से एक धूर्त आदमी ने मुर्दे का स्वांग किया । ] १४३. विरोचन जातक .. .. .. .. ११० [ गीदड़ ने शेर की नकल करके पराक्रम दिखाना चाहा । हाथी ने उसे पाँव से रौंद दिया, उस पर लीद कर दी । ] १४४. नङ्गुट्ठ जातक .. .. .. .. ११४ [ ब्राह्मण अग्नि-भगवान को गो-मांस चढ़ाना चाहता था । चोर ही उस बैल को मार कर खा गए । ब्राह्मण बोला—हे अग्नि भगवान् ! आप अपने बैल की रक्षा भी नही कर सके । अब यह पूँछ ही ग्रहण करे । ] १४५. राध जातक .. .. .. .. .. ११६ [ पोट्ठपाद और राध नाम के दो तोते ब्राह्मणी का अनाचार प्रकट करने के बाद उस घर में नही रहे । ] १४६. काक जातक .. .. .. .. .. ११८ [ कौवी को समुद्र बहा ले गया । कौवों ने क्रोधित हो उलीच-उलीच कर समुद्र खाली करना चाहा । ] १४७. पुप्फरत्त जातक .. .. .. .. १२१ [ स्त्री ने केसर के रंग का वस्त्र पहन उत्सव मनाने की जिद की । स्वामी को चोरी करनी पड़ी । राजाज्ञा से उसका वध हुआ । ] १४८. सिगाल जातक .. .. .. .. १२४ [ मास-लोभी सियार हाथी के गुदा मार्ग से उसके पेट में प्रविष्ट हो वहां कैद हो गया । ] १४९. एकपण्ण जातक .. .. .. .. १२८ [ बोधिसत्त्व ने नीम के पौधे के दो पत्तों की कड़वाहट चखा कर राजकुमार का दुष्ट स्वभाव दूर किया । ]