भारतकोश
कबीर मन्शूर (स्वसंवेदार्थ प्रकाश)

कबीर मन्शूर (स्वसंवेदार्थ प्रकाश)

Kabir Manshoor (Svasamvedarth Prakash)

कबीर साहेब द्वारा

स्रोत: कबीर मन्शूर स्वसंवेदार्थ प्रकाश · खेमराज श्रीकृष्णदास (उद्गम)

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रचना की । यही चारों इस सूष्टिके उत्पन्न कर्ता हैं । अण्डज खानि को अद्याने उत्पन्न किया, अण्डजखान उसको कहते हैं जिसकी उत्पत्ति अण्डे, द्वारा होती है ।

दूसरे पिण्डज खानको ब्रह्माने बनाया—पिण्डज खान वह है, जो बच्चा देते हैं ।

ऊष्मजखान विष्णुने उत्पन्न किए—ऊष्मज खान वह है जो वस्तुओंके भले बुरे संयोगसे उत्पन्न होते हैं । जैसे मच्छड मक्खी इत्यादि ।

स्थावर खानके रचयिता शिवजी हैं और स्थावर खानमें समस्त जड-पदार्थ हैं ।

इस प्रकार इन चारोंसे चारखान चौरासी लाख योनिके जीव उत्पन्न हुए । इस प्रकार सब जीव सारे संसारमें भरगये । तब अद्याने अपने तीनों पुत्रों—को तीनों लोकोंका राज्य सौंप दिया और आप मथुराको छोड़कर कोट कांग-डामें गयी । फिर हिंगलाजमें जाकर रहने लगी ।

इधर तीनों भाई लोकोंपर राज करने लगे और नरक वैकुण्ठ इत्यादिका प्रचार हुआ और तीर्थ, व्रत, कर्म, धर्म, वेद पाठ इत्यादि संसारमें प्रचलित हुए तथा सिद्ध, साध, साधक इत्यादि सब प्रकट हुए । इस प्रकार तीनों देवताओंका राज्य पृथ्वी पर प्रचलित हुआ । उन्हीं तीनोंको समस्त मनुष्य जाति परमेश्वर जानने और उन्हींकी पूजा सेवाको सत्य मानने लगी और यही तीनों समस्त संसारके परमेश्वर ठहरे ।

बयालीसवाँ प्रकरण

वैकुण्ठका वृत्तान्त ।

वैकुण्ठ पृथ्वीसे साठ सहस्र योजन ऊँचा है—और दक्षिण और पूर्वके कोने पर ध्रुव भक्तका स्थान है । उसके दक्षिण और पश्चिमके कोनेमें अग्नि देवता रहते हैं उसके पूर्व और दक्षिणके कोनेमें राजा इन्द्र रहते हैं । यह वैकुण्ठ बड़ा सुन्दर स्थान है और विष्णुके रहनेकी जगह है । इस वैकुण्ठके बीचोंबीच विष्णुका सिंहासन स्थित है उस सिंहासनपर विष्णु महाराज विराजते हैं और सारे देवता, ब्रह्मा, महेश इत्यादि उनके दरबारमें उपस्थित रहते हैं । यही विष्णु परमेश्वर और सर्वशक्तिमान् इत्यादि कहलाते हैं । सातों आकाश तथा पृथ्वी पातालादि सब चौदहों भुवनमें आप आया जाया करते हैं । प्रत्येक स्थानपर विष्णु उपस्थित रहते और सब सिद्ध साधु इत्यादिको बन्दरके भांति नचाया करते हैं । यह विष्णु मायापति हैं, उनकी मायाने समस्त संसारको घेर रक्खा