कबीर मन्शूर (स्वसंवेदार्थ प्रकाश)
Kabir Manshoor (Svasamvedarth Prakash)
कबीर साहेब द्वारा
स्रोत: कबीर मन्शूर स्वसंवेदार्थ प्रकाश · खेमराज श्रीकृष्णदास (उद्गम)
पृष्ठ 1197, कुल 1367 में से
संदर्भ में पढ़ेंनव्वाबने पूछा इसके बचनेका कोई उपाय है या नहीं ? काजी मुल्लाओंने कहा कि, यदि यह बालक मुसलमान हो जाये तो बच सकता है । नव्वाबने हकीक़त-रायको गोदमें बैठा लिया । कहा कि, अब तू मेरा बेटा है, यदि तू मुसलमान हो जायेगा तो तेरेको अपना राज्य दे दूंगा । हकीक़तरायने साफ़ २ उत्तर दिया कि, मैं सांसारिक धन दौलत नहीं चाहता, मैं अपना धर्म नहीं छोड़ूंगा । हकीक़त-रायके माता पिताने भी समझाया कि, बेटा ! तू मुसलमान होना स्वीकार कर ले, तेरी जान बच जावेगी । हकीक़तरायने अपने माता पिताको बहुत समझाया कहा कि यह देह और संसार सभी नाशमान हैं, एक दिन सब नष्ट हो जावेंगे, किस दिन और किस सुखके लिये अपना धर्म छोड़ूँ ? माता पिता पुत्रके ज्ञान विवेकको देखकर कुछ विशेष नहीं कह सके । नव्वाबसे कहा कि, उसके तुल्य सोना चाँदी मुझसे लेलो इसकी जान छोड़ दो पर दुष्ट काजियों और मुल्लाओंने न माना । नव्वाबने हुकुम दिया कि, पहले इस लड़केके कोड़े मारो, छुरा चुभाओ, तलवार दिखाओ । यदि भयसे मुसलमान हो जावे तो अच्छी बात है । बधिकने वैसाही किया । हकीक़तरायको बहुत कष्ट और दुःख हुआ । पर बाहरे बहादुर ! ! ! ज़रा भी कष्टकी परवाह नहीं की । शरीर और सब संसार तथा मृत्युको धर्मकी अपेक्षा तुच्छ जाना । अन्तमें जब बहुत कष्ट देनेपर भी हकीक़तरायने मुसलमान होना स्वीकार नहीं किया तो बधिकको बध करनेकी आज्ञा हुई । बधिक तलवार लेकर हकीक़तरायके निकट गया उनकी सुन्दरता और कांतिको देखकर आशक्त हो गया, चित्त मोहवश ऐसा निर्बल होगया कि, तलवार हाथसे गिर पड़ी, स्वयम् रोने लगा वरन् गिर पड़ा । हकी तरायने बधिकको खूब समझाया कि, तू मत रोओ उठ खड़े हो, मेरा शिर काट लो तू स्वर्गको जायगा और ये सब काजी मुल्ला नरकको जायेंगे । अब यहाँसे मुसलमानो राज्य नष्ट हो जावेगा, सिकखोंका राज्य होगा ; तू किसी बातकी चिंता मतकर, मोहको त्याग मेरा शिर काटले । उस समय हकीक़तरायका अन्तःकरण प्रकाशित हो गया था । भविष्य कहने लगे । क्यों न हो ? जो अपने धर्मपर दृढ़ विश्वास रखता है, संसारसे धर्मको अच्छा समझता है, दैवी गुणोंको आसुरी गुणोंको अपेक्षा प्रेमकी दृष्टिसे देखता है, ईश्वरपर सच्ची श्रद्धा रखता है, उसको क्या दुर्लभ है ? बधिकने तलवार मारी, हकीक़तरायका शिर धड़से अलग जा गिरा । जिस समय बधिकने तलवार चलाई, उस समय लाहौर में अंधेरा छा गया, भूकम्प आया, नगरभरमें शोक फैल गया, सबके सब बालकसे लेकर बृद्ध तक रोने और हाथ मारने लगे । हकीक़तरायकी मृतक देहको नदी