कबीर मन्शूर (स्वसंवेदार्थ प्रकाश)
Kabir Manshoor (Svasamvedarth Prakash)
कबीर साहेब द्वारा
स्रोत: कबीर मन्शूर स्वसंवेदार्थ प्रकाश · खेमराज श्रीकृष्णदास (उद्गम)
पृष्ठ 1220, कुल 1367 में से
संदर्भ में पढ़ेंसिरिफ तू पेटकी खातिर है जुता । हुआ जेरो जबर ऐ बैल तेली ॥
कि जिसीने पेटमें यह पेट पाला । जरा इस रुख निगर ऐ बैल तेली ॥
कि जिसने शीर मादरको बनाया । कुछ उसका ध्यान धर ऐ बैल तेली ॥
खली खाना व दायम कैद रहना । यह तुझको खूब तर ऐ बैल तेली ॥
लगा शौतान तेरे कान दिन रात । हुआ कर बैल व खर ऐ बैल तेली ॥
नसा यह साधु गुरुको तू न मानै । परे हो कर तू मर ऐ बैल तेली ॥
अगर जज्जाल दुनिया छोड़ भागै । चरागह घास चर ऐ बैल तेली ॥
जो फिरते फिरते आदम घरमें आया । हुआ शबसे सेहर ऐ बैल तेली ॥
इस आजिज वाज सुन उठ जागगा फिल । चला खाब व खमसः ऐ बैल तेली ॥
इस दुनियाके कोई काम सच्च नहीं हैं ।
मृत लोक नरक स्वर्ग धाम सच्च नहीं हैं ॥
यह तीन लोक झूठ बाजीगरका तभाशा ।
ब्रह्मा व ईश वाम सच्च नहीं हैं ॥
यह सारा संसार सब झूठ पसारा ।
यमकाल और जज्जाल दाम सच्च नहीं हैं ॥
नेकी बदी व स्वर्ग नर्क दोनों कहाते ।
और नाद बिन्द हाड चाम सच्च नहीं हैं ॥
सब खांदे ना खांदे हुकमा जमानःके ।
दुनियामें कोई पुस्ता खाम सच्च नहीं हैं ॥
यह गरदू गरदाने और चन्द सितारे ॥
दिन रात वक्त सुबह शाम सच्च नहीं हैं ॥
पैदाइशो बक्का फना सो सारे मिस्ल खाब ।
कोई आजिज माया पर नाम सच्च नहीं हैं ॥
केती जबानै सीखलीं तोता व मंना खूब है ।
लोगोंको मुतहैयर करै बोलै बोल अजूब है ॥
पिजरेमें उसको बन्दकर गुफ्तारसे आनन्द कर ।
इस कैदको दह चन्दकर दुनियाका सो महबूब है ॥
बोलै जो शीरीं बोल सो ले लोगका दिल मोलसो ।
सुननेको आवैं गोलसो हर एकके वह मरगूब है ॥
इल्मों फ़नू सब सीख लिया यमराजको खुद सिर दिया ।