कबीर मन्शूर (स्वसंवेदार्थ प्रकाश)
Kabir Manshoor (Svasamvedarth Prakash)
कबीर साहेब द्वारा
स्रोत: कबीर मन्शूर स्वसंवेदार्थ प्रकाश · खेमराज श्रीकृष्णदास (उद्गम)
पृष्ठ 1318, कुल 1367 में से
संदर्भ में पढ़ेंइतनी बात सुनकर इब्राहीमने कहा कि, मेरा खुदा सर्व शक्तिमान है उसको कौन मार सकता है ? इतना कहकर पहाड़पर गये । ईश्वरसे प्रार्थना की कि, या खुदा नमरुद बड़ा अभिमानी हो गया है कि, कुछभी कहना नहीं मानता । तू अपनी फौज दिखला दे । तब खुदाने हुकुम दिया कि, जाकर नमरुद से कहदे अपनी फौज तैयार करे मेरी भी फौज आती है । इब्राहीमने आकर नमरुदसे कहा मेरे खुदाकी फौज आयाही चाहती है । इतना सुनकर नमरुदने अपनी फौजको हुकुम दिया, वे सब युद्धके लिये तैयार होकर मैदानमें उपस्थित हुये । उधर एक ऐसी जहरीले डंकवाले मच्छरोंकी फौज ऐसी आई कि, एक मच्छर भी किसी मनुष्य अथवा घोड़े हाथीपर बैठ जाता तो वह तत्कालही मृत्युको प्राप्त होता । इसी प्रकार नमरुदकी सेनाको नष्ट कर डाला । एक मच्छरने नमरुदके भी मस्तिष्कमें घुसकर उसका भेजा खाना आरम्भ किया । आराम न होनेपर नित्य प्रति जूतासे उसका मस्तिष्क ठोका जाने लगा । इब्राहीम ने बहुत प्रकारके आश्चर्य कौतुक दिखाकर उसे समझना चाहा लेकिन उसने एक को भी न माना ।
फिरऊन—यही दशा फिरऊनकी हुई थी उसको मूसाने बहुत समझाया पर न माना, अन्तमें सेनासहित नदीमें डूबकर भर गया ।
अख्याब बादशाह—पुराने अहदनामे के दूसरी तवारीखका १८ बाव-१६ से ३४ आयतक लिखा है कि, जब अख्याब बादशाहको खुदाने नष्ट करना चाहा उस समय खुदाका ऐसा प्रकाश भयानक रूप देखा कि, फिरिस्तोंकी सेनाके बीचोबीचमें ज्योति खड़ी है । एक असत्य आत्माने आकर कहा या खुदा मैं झूठी रहूँ हूँ यदि आप आज्ञा दो तो नबियोंके भीतर जाकर नबियोंसे झूठी साक्षी दिलवाऊँ जिससे अख्याब मारा जावे ।
यह बात सुनकर खुदाने हुकुम दिया कि, अच्छा जा, नबियोंसे साक्षी भरा । वह असत्य रहूँ वहांसे चली, नबियोंको बहकाया । जब अख्याबने सब नबियोंको बुलाकर पूछा कि, तुम लोग बतलाओ कि, मैं युद्धमें जाऊँ तो मुझे जय प्राप्त होगी ? नबियोंने झूठी साक्षी भरी कि, हाँ जा तेरीही जय होगी । वह लड़ाईमें गया सेनासहित मारा गया ।
ऐसेही कालपुरषने सब आदमियोंके साथ एक झूठी आत्मा लगा दी है जिससे सुमार्ग छोड़ कुमार्गमें लगे रहे भक्ति मुक्तिकी ओर न झुकें । पर जो लोग सतगुरुसे सत्य प्रीति करते हैं उनपर झूठी आत्माका बल नहीं चलता क्योंकि,