कबीर मन्शूर (स्वसंवेदार्थ प्रकाश)
Kabir Manshoor (Svasamvedarth Prakash)
कबीर साहेब द्वारा
स्रोत: कबीर मन्शूर स्वसंवेदार्थ प्रकाश · खेमराज श्रीकृष्णदास (उद्गम)
पृष्ठ 325, कुल 1367 में से
संदर्भ में पढ़ेंदेखो ग्रंथ कबीरसागर नं. १०—शवासगुञ्जार पृ० १११—११२.
साखी—बिरछा नाहीं फल भखैं, नदी न अचवैं नीर ॥
परमारथके कारणें, सन्तन धरा शरीर ॥
सन्त बड़े परमाधरथी, घन जाबरसैं आय ॥
तप्त बुझाव औरकी, अपनो पारस लाय ॥
साधु सराहिय ताहिको, जाको सतगुरु टेक ॥
टेका बनाए देह भर रहे शब्द मिल एक ॥
सत्य शब्द हित जानके, सुमिरे सतगुरु धीर ॥
धरमदास तुम वंश को, सिरंज्यो गुरु कबीर ॥
चौपाई ।
सत्य सुकृति सुमिरो मन माहीं । टूटत बजर राखलेउ राहीं ॥
साखी—सत्यसुकृतिके बाल कहै, जो चितवै कर डीठ ॥
ताजन तोरों चौहटे, गुनहगारकी पीठ ॥
ज दिया कहूँ तो जगतरे, परगट कहो न जाय ।
गुप्त परवाना देत हौं, राखौ शिरै चढाय ॥
जिन डरपो तुम काल को, कर मेरी परतीत ॥
सप्तद्वीप नौखण्डमें, चलिहौं भवजल जीत ॥
यहांतक तो चार गुरु और बयालीस वंशका लेखा लगचुका है । इनके अतिरिक्त कबीर साहबके बारह पंथ और भी हैं । वे भी कबीरपंथीही कहलाते हैं ।
कबीर साहबके बारह पंथोंका सामान्य परिचय ।
१—नारायणदासजीका पंथ । २—यागौदासजीका पंथ । ३—सूरत गोपाल पंथ । ४—मूलनिरंजनका पंथ । ५—टकसारी पंथ ॥ ६—भगवान्दासजीका पंथ । ७—सत्यनामी पंथ । ८—कमाली पंथ । ९—रामकबीर पंथ । १०—प्रेमधामकी वाणी । ११—जीवा पंथ । १२—गरीबदास पंथ ।
यह तो कबीर साहबके बारह पंथ हैं । इनमें कोई २ अच्छे हैं और कोई विश्वासके निर्बल हैं । राम कबीरके लोग ठाकुरपूजा करते हैं । सत्यनागियोंके यहां प्रायः ध्यानभी प्रचलित हैं । इन बारह पंथोंका यही विवरण है ।
१ बूझ, २ खांयें, ३ सीखें, ४ लिये, ५ महात्माओंने ६ परोपकारी, ७ मेघ, ८ तहर, ९ पारसकी तहका सत्य उपदेश, १० प्रण, ११ उनके उपदेशसे होतेही उसीमें लगजाय, १२ माना, १३ धर्मदास, १४ वज्र, १५ मार्ग, १६ देखे, १७ दृष्टि १८ प्रत्यक्ष, १९ चिट्ठी, २० मत, २१ विश्वास २२ संसार सागर ।