कबीर मन्शूर (स्वसंवेदार्थ प्रकाश)
Kabir Manshoor (Svasamvedarth Prakash)
कबीर साहेब द्वारा
स्रोत: कबीर मन्शूर स्वसंवेदार्थ प्रकाश · खेमराज श्रीकृष्णदास (उद्गम)
पृष्ठ 431, कुल 1367 में से
संदर्भ में पढ़ेंमनुष्योंने । इसके उपरान्त नूहने किया । फिर इबराहीमने मनुष्यका बलिदान किया अर्थात् अपने पुत्र इसहाकको बलि दे दिया ।
यरमयाह नबीकी पुस्तकका (१९) बाब (४) (५) आयत इन्होंने मुझको छोड़ दिया इस मकानको दूसरोंके निमित्त ठहराया इसमें अन्यान्य अल्लहों के निमित्त लोहबान जलाया । जिन्हें न बे न उनके पिता दादा । न यहूदाहके रहने वाले जानते थे उस गृहको निर्दोषोंके रक्तसे भर दिया, उन्होंने बअलके निमित्त ऊंचे २ मकान बनाए जिसमें अपने पुत्रोंको जलाकर बलिप्रदान करनेके निमित्त अग्निमें जलावे । जो मैंने न आज्ञा की न उसका विवरण किया न यह मेरेमें ही था ॥
अर्थात् परमेश्वर यह बात यरमयाह भविष्यवक्तासे कहता है ।
फिर काजियोंकी पुस्तकके (११) बाब (३०- आयतसे लेकर (४०) आयतपर्यन्त पढ़ो लिखा है कि, अफसनाहने परमेश्वरकी मनौती की कहा कि, यदि निश्चय ही तू नबी अमूँको मेरे हाथमें करदे तो ऐसा होगा कि, विजयोपरान्त गृह पर पहुँचूँ तो जो कोई प्रथम मेरे सामने आवेगा उसको मैं जलाकर बलिप्रदान करूँगा । जब वह गृहमें आया तब उसकी पुत्री पहले सामने आई उसने अपनी पुत्री को जलाकर बलिप्रदान किया । मुझको ऐसाही स्मरण है कि मैंने, किसी मुसलमानी पुस्तकमें पढ़ा था कि, अबदुलमुत्तलिब जो मुहम्मद साहबका दादा था उसने मनौती कि, यदि मेरे दश पुत्र हों तो उनमेंसे एकको मैं परमेश्वरके निमित्त बलिप्रदान करूँगा । अबदुलमुत्तलिबके जब दश पुत्र उत्पन्न हुए, तब वह अपनी प्रतिज्ञा पूरी करनेके लिये भवकहके पुजारियोंके पास गया और कहा कि, मैं दशमेंसे एक पुत्रका बलिप्रदान करूँगा । परमेश्वरकी मनौती पूरी करूँगा । इस बात पर भवकहके पुजारियोंने कहा कि, हम इस प्रकार करेंगे कि, पास डालेंगे । तुम्हारे दश पुत्रोंमेंसे जिसके नाम पास पड़ेगा उसको बलिप्रदानके निमित्त लेलेवेंगे तब उन्होंने पास फँका वह पास अबदुल्लाके नाम पर पड़ा । उन पुजारियोंने अबदुल्लाके बलिप्रदान करनेका बाँधन बाँधा । इस विषयपर अबदुलमुत्तलिब उसका पिता बहुत घबराया कहा कि, मेरा यह पुत्र बड़ा योग्य है । कारण यह कि, यह अबदुल्ला, बड़ा धार्मिक भला आदमी पुण्यात्मा और सुन्दर था । इस कारण न चाहता कि अबदुल्लाका बलिप्रदान करें । जब अबदुलमुत्तलिब इस सोचमें फिरता था तब उसको लोगोंने परामर्ष दिया कि, तू अमुक स्त्रीके समीप जा वह तुझको युक्ति बतलावेगी । वह स्त्री उस समय किसी देवकी पूजा करती थी । जब अबदुलमुत्तलिब उस स्त्रीके समीप गया तब उसने यह युक्ति बतलाई कि, एक तौल बनाकर