भारतकोश
कबीर मन्शूर (स्वसंवेदार्थ प्रकाश)

कबीर मन्शूर (स्वसंवेदार्थ प्रकाश)

Kabir Manshoor (Svasamvedarth Prakash)

कबीर साहेब द्वारा

स्रोत: कबीर मन्शूर स्वसंवेदार्थ प्रकाश · खेमराज श्रीकृष्णदास (उद्गम)

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पृष्ठ 472

कहता समाज निकसे है जानो । सो हीरा मनि माणिक जानो ॥
यथा — क्षार मीठ जल यहाँ अपरा । वहाँ कहाँ गुरुकर निर्धारा ॥
जन्दा० — नैन नाक इन्द्री जल खारी । गुदा श्रवण जानो जलधारी ॥
क्षार मीठ जल सबहीं भराही । जो ब्रह्माण्ड सो पिण्ड कहाही ॥
नान० — यहाँ तो काठ लोहकी नौका । कहो स्वामि व्यौहार वहाँका ॥
जन्दा० — पुरुष नाम नौका यहँ भाई । खेवट सद्गुरु संत मिलाई ॥
पुरुष शब्द सुमिरौ लौ लाई । पुरुष प्रताप उत्तर चल भाई ॥
नान० — वाह गुरु समरथ' वाह गुरु जन्दा । काट देव तुम भवजल फन्दा ॥
धन्य कबीर परम गुरु ज्ञानी । अमर भेद भाखी निजवानी ॥
समर्थन ।

केवल भारत वर्षीय ज्ञानी गणही इस बातको मानते नहीं हैं कि, जो कुछ पिण्ड है वही ब्रह्माण्ड है । बरन् अरब यूनान मिश्र और अलीमानके सब ज्ञानियों का ऐक्य है कि पिण्ड तथा ब्रह्माण्ड दोनों समान हैं, तनिक भी विभिन्नता नहीं । वे लोग भी कहते हैं कि, हाड़ पर्वत हैं, पसीना निकलना बृष्टिका होना है । समस्त पशु और देवतागण दोनोंमें एकही ढङ्गसे भरे हैं । समस्त चरनेवाले उड़नेवाले और फाड़नेवाले दोनोंमें एक समान बसे हुए हैं । ऐसाही सेवक परिश्रमी भजद्वर इत्यादि दोनोंमें एक समान हैं जो पाचक शक्ति है उसको बबरची बोलते हैं । जो बल अंतडियोंमें भोजन रखता है उसका नाम गन्धि है, जो बल रक्तको श्वेत करता है, स्त्रीके स्तनमें दुग्ध और मर्दके फोतामें वीर्यको श्वेत करता है उसको धोबी कहते हैं । जो बल शरीरके अङ्गमें भोजन बाँटता है उसका नाम बंधानी है । जो बल जलको श्वेत बनाकर बाहर निकालता है वह भिश्ती है । जो बलविशेष को बाहर निकाल डालता है वह हलालखोर है । जो बल वायु तथा पित्तको भीतर रखता है सो न्यायी है । जो क्रोध है वह भेड़िया है । ऐसाही समस्त बनाव पिण्ड तथा ब्रह्माण्डका है सब एक है उसमें तनिक भी विभिन्नता नहीं ।

प्राचीन कालके लोगोंका तो यही सिद्धान्त है । अब हालके लोगोंको बातें सुनो कि, अंग्रेजीकी पुस्तकें जो मैंने देखीं तो उससे प्रगट है, नेचुरल डिक्शनरी और नेचुरल हिस्ट्री इत्यादिको भलीभाँति ढूँढ़कर देखो तो समस्त विद्वान इस


१ पहिले जो विषय कहा गया है, कि पिण्ड और ब्रह्माण्ड ये दोनों एक हैं इसी विषयकी पुष्टिमें कबीर नानक शाहका संवाद लिख दिया है जो कि, नानक बोधमें लिखा हुआ है । पहिले जो कुछ पदार्थ कह दिया है वो इसका विस्तृत अर्थ है इस कारण इसका अर्थ नहीं करते ।