कबीर मन्शूर (स्वसंवेदार्थ प्रकाश)
Kabir Manshoor (Svasamvedarth Prakash)
कबीर साहेब द्वारा
स्रोत: कबीर मन्शूर स्वसंवेदार्थ प्रकाश · खेमराज श्रीकृष्णदास (उद्गम)
पृष्ठ 492, कुल 1367 में से
संदर्भ में पढ़ेंफोड़वाई थी। सब पुकारने लगे कि, इस पहलेके अंधेने हमारी आँख फोड़वाई है। उस पहलेके अंधेका पाजीपना पूरा प्रगट हो गया।
नकटोंका पन्थ।
मैंने सुना था कि, एक राजाके पास एक मोडा जार रहता था। राजा उसकी बहुत कुछ मान मर्यादा किया करता था, वह बड़ा पाजी तथा दुष्ट था, बहुत पाजीपना किया करता था, पर राजा दयापूर्वक उसको टाल देता, उसको दण्ड न देता था। उसकी विद्याके कारण उसकी बुराई ढाँपता। एक बार वह महादोषके कारण पकड़ा गया। कि, जिसके निमित्त दण्ड न देना राजाको नितान्तही अनुचित मालूम हुआ तो भी राजाने इतना पक्ष किया कि केवल उसकी नाक कटवाकर देशसे बाहर निकाल दिया। उस पाजीने देशसे बाहर निकलकर कुछ यंत्र मंत्र इत्यादिकी साधनाकी। कितनीक जादूगरी इत्यादिसे अपनेको बड़ा चढ़ा लिया जब अपना कार्य सम्पूर्ण करचुका तब अनेक मनुष्योंको धोखा देने लगा। मुक्तिकी आशा दिलाने लगा। आप गुरु बन लोगोंको उपदेश देदेकर शिष्य बनाने लगा। कितनेही लोग उसके भृत्य बनगए। जो कोई उसका चेला बनता उससे वह यही कहता कि, यदि अपनी मुक्ति चाहते हो, तो तुम अपनी नाक कटाओ नकटे बन जाओ। उसके सब शिष्योंने नाकें कटवाई। जैसे कि, मुसलमानों तथा इब्रानियोंका खुतना होता है। इसी प्रकार उनकी नाककी खुतना होने लगा। नकटोंका एक बड़ा झुण्ड उसके साथ हुआ। वह मोडा साधुकी सूरतमें भस्म इत्यादि रमाकर अवधूत बन गया। नकटे पंथका अगुवा हुआ। अपने शिष्योंसहित उसी देशमें पहुँचा बहुत दिवस बीत चुके थे। इस पाजी मोडेकी बात लोग भूल चुके थे इस कारण उसको किसीने नहीं पहचाना। भुज नगरमें रहने तथा उपदेश देने लगा। कितने मनुष्य उस नगरमेंभी उसके शिष्य होगए। उसकी बड़ी प्रशंसा होने लगी। लोगोंको उसने बडे कौतुक दिखाए। यहाँतक कि, स्वयम् राजा उनके दर्शनके निमित्त आए, राजाको भी उसने भौति भौतिके खेल दिखाए जिससे राजाके मनमें उसका विश्वास जम गया। तब राजाको वह समझाने लगा कि, ए राजा ! यह देह तुच्छ तथा घृणित है। यदि परमेश्वरके अर्थ लगाई जावे तो मनुष्यकी मुक्ति हो जावे इस कारण हे राजा ! तू अपनी नाक कटवा कर मुक्ति ले। राजाने अपनी नाक कटवाई उसका शिष्य बन गया। जब राजा शिष्य हो चुका, तब वह पिशाच रानीके पास जाकर समझाने लगा कि, ए रानी ! यह शरीर तो चार दिवसोंमें मिट्टीमें मिल जावेगा तू अपनी नाक कटवा कर