भारतकोश
कबीर मन्शूर (स्वसंवेदार्थ प्रकाश)

कबीर मन्शूर (स्वसंवेदार्थ प्रकाश)

Kabir Manshoor (Svasamvedarth Prakash)

कबीर साहेब द्वारा

स्रोत: कबीर मन्शूर स्वसंवेदार्थ प्रकाश · खेमराज श्रीकृष्णदास (उद्गम)

Devanagarihipublished1,367 पृष्ठ

पृष्ठ 793, कुल 1367 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 793

३५ वैकुण्ठका पक्षी होना—बीबी आयशा सद्दीकासे कहावत है । आयशा कहती हैं कि, एकबार किसी मित्रकी ताबूतके साथ हजरत रसूलल्लाहको नमाज पढ़नेके लिये बुलाया । उस समय आयशाने कहा कि, ऐ रसूलल्लाह ! हर्षित हो कि, वह बालक वैकुण्ठके पक्षियोंमें से एक है । इस कारण कि, उसने कुछ बुरा काम न किया था तब नबीने उत्तर दिया कदाच ऐसा न हो । क्योंकि, खुदाने उनको पिताके वीर्यके साथ ठहराया है । नरकी तथा वैकुण्ठी वीर्यके साथही ठहरें हैं और उसी भाग्यके अनुसार नरक तथा वैकुण्ठको जावेंगे ।

अब इन कथनोंसे प्रगट हुआ कि, मुहम्मद साहबको मालूम नहीं था कि, वह लड़का वैकुण्ठका पक्षी होगा अथवा नहीं । वह बालक जो अनजान था उसके विषयमें मुहम्मद साहबने अपनेको अनभिज्ञ बताया । फिर कहा है, भोले बच्चे वैकुण्ठको जाते हैं । यह बात भी कुछ ठीक मालूम नहीं होती । दूसरी यह बात भी प्रगट हुई कि, अच्छे मुहम्मदी मर मरकर पक्षी तथा पशु होते हैं । चाहे वे वैकुण्ठके ही क्यों न हों । भलाजी, जब कोई मनुष्यसे पक्षी हो जावेगा तब उसकी दशा अच्छी कैसे समझी जावेगी ? क्योंकि, मनुष्यकी देहमें तो ज्ञान होता है पशु पक्षीकी देह तो पूर्णतया अन्धकारमें रहती हैं । जो वैकुण्ठका पक्षी हुआ तो क्या लाभ हुआ ।

३६ पूर्वके प्रेम आदि—मुहम्मद साहबने प्रेमके विषयमें इस प्रकारसे कहा है । सुन्नरों मशकानुल, बाबुलहब्ब फौअल्लाह, आवशासे मुसल्लसका कहना है कि, संसारमें आने उत्पन्न होनेसे पूर्व सब मनुष्योंके रुहकी एक एकत्रित सैन्य थी । जिन आत्माओंमें वहाँ सम्बन्ध और मैत्री थी । अब यहाँ भी उनमें प्रेम है जिनमें वहाँ वैमनस्यता थी उनमें यहाँ भी मिलाप नहीं होता है ।

यह सोचनेकी बात है कि, रुहमें मैत्री विरोध तथा प्रेमादिका होना सम्भव नहीं हो सकता । क्योंकि, ये सर्व शरीरके धर्म हैं, रुहके नहीं हो सकते, सब कामनायें शरीरमें ही होती हैं, रुहमें नहीं होतीं । पवित्रात्माको कौन वशी-भूत कर सकता है ? इससे प्रमाणित होता है कि, मुसलमान लोग सूक्ष्म शरीर-की ही रुह कहते हैं—जो कि अपने पूर्वकर्मोंसे सदा परिपूर्ण रहता है ।

३७ भाग्य—मुसल्लम बिनयसारका कथन है कि, हजरत रसूलल्लाहने फरमाया कि, वास्तवमें खुदाने आदमको उत्पन्न किया, अपने हाथसे उसकी पीठको छुवा, उससे एक कौम (जाति) निकली । आदमसे कहा कि, मने यह जाति वैकुण्ठके लिये निकाली है । उनके सर्व कार्य वैकुण्ठके जानेवालोंकेसे होंगे, फिर खुदाने आदमकी पीठको दूसरी बेर बांये हाथसे छुआ, उससे दूसरी