कबीर मन्शूर (स्वसंवेदार्थ प्रकाश)
Kabir Manshoor (Svasamvedarth Prakash)
कबीर साहेब द्वारा
स्रोत: कबीर मन्शूर स्वसंवेदार्थ प्रकाश · खेमराज श्रीकृष्णदास (उद्गम)
पृष्ठ 863, कुल 1367 में से
संदर्भ में पढ़ेंअन्तर्यामिनी कुतिया—जौनपुर जिलेके बदलापुर मौजेमें एक कुतिया थी वह बच्चोंको जनते ही खा जाती एक भी जीवित न छोडती थी एक बार एक ब्राह्मणने उससे एक बच्चा छीन लिया उसको खाने न दिया । उसको पालता रहा । जब वह बच्चा बड़ा हुआ तो ऐसा विपैला हुआ कि, जिसको काटता वह भूंक भूंककर मर जाता । उसका काटा हुआ कहता कि, मेरी माता कुतिया अन्तर्यामिनी थी इस कारण वह अपने सारे बच्चोंको खा जाया करती थी । इसका कारण यह था कि जितने बच्चे उसके पेटसे उत्पन्न होते थे सबके सब विपैले होते थे । यह दशा देखकर ब्राह्मणने उस कुत्तेके पालनेका बहुत खेद प्रगट किया । लोगोंने उस कुत्तेको मारकर फिकवा दिया ।
मोतीराम—अवध पश्चिमोत्तर प्रान्तके कोटवानामके कसबेमें जगजीवनदास नामके एक श्रेष्ठ पुरुष, सत्य नामियोंके पंथके आचार्य हुये हैं । वे कबीर साहबके शिष्य थे । उनके पास एक मोतीराम कुत्ता था । वह उनका बड़ा आज्ञाकारी था । जगजीवनदासने उसके कृतज्ञतादि गुणको भली भाँति देखकर उस पर बड़ी दया की, महन्तों की तरह सेली टोपी पहना दी । वह कुत्ता भी सारे साधुओंके साथ भजन कीर्तन सुना करता था जैसे साधु सुनते हैं ।
एक दिन ऐसी घटना हुई कि, मोतीराम अन्यान्य कुत्तोंके साथ मिलकर चमारोंकी बस्तीमें गया । वहाँ पशुवोंकी हड्डियोंका ढेर लगा हुआ था । सारे कुत्तोंने एक एक हड्डी लेली । मोतीरामने भी सजातियोंके साथ हड्डी उठा ली । लोगोंने जगजीवनदासजीको समाचार दिया । देखो मोतीरामने मुंहसे हड्डी पकड़ी है । उन्होंने जाकर देखा तो पुकार कर कहा कि, ऐ बेईमान मोतिया ! अब तू मुझको अपना मुंह मत दिखा । यह बात सुनते ही मोतीराम नितान्त ही लज्जित होकर बैठ गया । उसने उसी समय प्राण त्याग दिये ।
जगजीवनदासजीने उसकी समाधि बनवा दी । सुना है कि, उसकी समाधि वहाँ अभीतक बनी हुई है । जिस किसीको पागल कुत्ता काटता है वह मोतीरामके नामसे यह कहता कि, मैं तुम्हारी समाधिपर कुछ चढ़ाऊँगा, मुझे कुत्तेका विष न चढ़े । जब वह चढ़ा हो जाता है तो वह मोतीरामकी समाधिपर जाकर अपनी मनौती पूरी करता है ।
पठानका कुत्ता—अवध पश्चिमोत्तर प्रान्तकी एक बात है कि, एक पठानने आवश्यकतावश एक महाजनसे दो सौ रुपया लिया, अपना कुत्ता उन रुपयोंके बदले उसको दे दिया प्रण किया कि, अमुक समयके पीछे मैं तुम्हारा रुपया चूकाकर अपना कुत्ता ले जाऊँगा । एक रातकी बात है कि, महाजनके