कबीर मन्शूर (स्वसंवेदार्थ प्रकाश)
Kabir Manshoor (Svasamvedarth Prakash)
कबीर साहेब द्वारा
स्रोत: कबीर मन्शूर स्वसंवेदार्थ प्रकाश · खेमराज श्रीकृष्णदास (उद्गम)
पृष्ठ 871, कुल 1367 में से
संदर्भ में पढ़ेंकहा कि, मैं समझता हूँ कि, गाय आलूके खेतमें है । केवल यह बात छेडीही गई थी उसपर विशेष चर्चा नहीं हुई थी, उस समय वह कुत्ता अचेत सोता हुआ जान पड़ता था पर उसने यह बात सुनली खिड़की द्वारा बाहर कूदा छत पर चढ़कर आँगनको देखा तो वहाँ गौ नहीं थी देखा कि, सब कुछ ठीक है, फिर अपने घरको पलट आया । कुछ कालके पीछे चरवाहेने फिर वही बात कही फिर वह कुत्ता उसी प्रकार गया उस मैदानको देखकर फिर आ बैठा, तीसरी बार फिर उसने उसी प्रकार कहा तब कुत्ता उठकर पूछ हिलाने लगा । अपने स्वामीकी ओर इस दृष्टिसे देखने लगा कि, तू मुझसे ठट्ठा करता है इस बात पर समस्त मनुष्य जोर जोरसे हँसने लगे । वह कुत्ता फिर अपनी जगह पर आ बैठा उस समय उन लोगोंके हँसी ठट्ठा करनेपर अत्यन्त क्रोधित जान पड़ता था ।
इसी पर हाग साहबका—कथन है कि, एक गड़रियेका कुत्ता बहुत बुद्धिमान था—वह ऐसा अद्वितीय कुत्ता था कि, किसीकी शुश्रूषा तथा प्यारको न मानता था अपने कार्यसे बहुत चौकस रहता था । ऐसा कृतज्ञ था कि, कुत्तोंकी जातिमें वैसा कोई न होगा । वह न किसीपर भूंकता, न कभी कोई भूलही करता जब वह एक वर्ष का था तभीसे भेड़ोंकी रक्षा करना सीख लिया था । जो कुछ उससे एक बार कहा जाता उसको वह कभी नहीं भूलता था । उसमें अत्यन्त बुद्धिमानी तथा विवेक प्रगट होता था । एक दिनका हाल है कि, उसके अधीन सात सौ बकरीके बच्चे तीन भागोंमें विभक्त होकर आधी रातको अपने बेड़ेसे भागकर पहाड़ पर चले गये । स्वामी तथा सहायकके वशसे बाहर हो गये । उस समय वह सरानामका कुत्ता भी दिखाई नहीं दिया । अंधेरी रात थी । उस कुत्तने अपने स्वामीको खेद करते सुना, चुपकसे उन बच्चोंकी खोजके लिये निकला । उसका स्वामी सारीरात उन बच्चोंकी तलाश करता रहा पर कहीं भी बच्चों और कुत्तेका कुछ पता न लगा । प्रातः काल उन्होंने देखा कि, समस्त बच्चे पहाड़की एक नीची जगहमें फिर रहे हैं । वह विश्वस्त कुत्ता उनकी रक्षा कर रहा है बड़े आश्चर्यका विषय तो यह है कि, उस कुत्तने समस्त बकरीके बच्चोंको ऐसी युक्तिके साथ रखा था कि गिनतीमें सब ठीक ठहरे एक भी कम नहीं हुआ, न जाने ऐसी अंधेरी रातमें किस प्रकार उसने उन समस्त बच्चोंको एक स्थानपर एकत्रित कर रखा था यह बात बुद्धिमें नहीं समाती । क्योंकि, उस अंधेरी रातमें समस्तर चरवाहे बच्चोंका सब प्रकारसे रक्षा करते तो भी वे छिटक जाते ।
मारटन साहबने—कुत्तोंके संबंधकी पुस्तकमें लिखा है कि, एक स्त्री