कबीर मन्शूर (स्वसंवेदार्थ प्रकाश)
Kabir Manshoor (Svasamvedarth Prakash)
कबीर साहेब द्वारा
स्रोत: कबीर मन्शूर स्वसंवेदार्थ प्रकाश · खेमराज श्रीकृष्णदास (उद्गम)
पृष्ठ 927, कुल 1367 में से
संदर्भ में पढ़ेंस्वामिनकी अनुपस्थितिमें अनेक सुनहली बहुमूल्य वस्तुओंको कुतर डाला । स्वामिनने आकर हानि देखी तो तोतेको अनेक झिड़कियां दीं । मारा फिर पिंजरेमें बंदकर दिया । सारे दिन उसने नाकुछ खाया न पिया, सांझ हुई तो तोतेने पुकारकर कहा कि जेको अब विश्रामके लिये विश्रामालयमें जाया चाहता है । नियमानुसार उसके पिंजरे पर पर्दा डाल दिया गया । उस समय सोनेके लिये पर्दाके भीतर कुड़कुड़ाने लगा । जिस प्रकार उसको झिड़की तथा दण्ड मिला था वेही सब बातें आपसे आप करने लगा कि, दुष्ट जेको नीच पक्षी तूने कैसे इतनी हानि की । आह मैं तुझको दण्ड दूंगी इत्यादि वे समस्त बातें जो उसकी मालकिनोंने कही थीं ज्योंकी त्यों कहा करता था । दूसरी सांझको भी उसी स्त्रीकी उसी प्रकार नकल किया करता था ठीक ठीक धीरे धीरे अपनी स्वामिनीकी तरह बोलता था ।
तोतेकी ईर्ष्या—समस्त पक्षी एक दूसरेसे ईर्ष्या करते हैं । पर तोता सबसे अधिक ईर्ष्या करता है । ली साहबका कथन है कि, मेरे मित्रके पास एक तोता था । उसकी मलकिन ने गानेवाली चिड़िया पर हाथ फेरकर प्यार किया उसपर हाथ फेरा उसका प्यार देखकर तोतेने ईर्ष्या की अप्रसन्न होकर बोलना छोड़ दिया । खाना भी त्याग दिया स्वामिनकी ओरसे मुँह फेर लेता । काटने दौड़ता । एक दिन धूप खानेके लिये गानेवाली चिड़ियाको बाहर रख दिया । इस चिड़ियाको अङ्गरेजीमें कोनेरी बर्ड कहते हैं यह अपने हर्षमें आकर गीत गाने लगी तोता ध्यान पूर्वक कान लगा शिर टेढ़ा करके चिड़ियाका गीत सुनने लगा । वह गाके चुप हुई तो तोता प्रशंसा करनेकी तरह उच्च स्वरसे बोला, बहुत अच्छा बहुत अच्छा ॥ फिर बोला, हा-हा-हा-हा ।
ईर्ष्यासे हत्या — इसी स्त्रीके भाईके पास भी एक तोता था । वह अपनी जातिकी छोटी चिड़ियोंसे बहुत ईर्ष्या करता था । इसके स्वामीके पास एक छोटी चिड़िया थी । जिसको वह बहुत प्यार करता था । उसका पिंजरा शयनागारके समीप लटकाया हुआ था । एक रात ऐसी घटना हुई कि, छोटी चिड़िया बहुत चिल्लाई । उसकी चिल्लाहटसे सरायका स्वामी जागा, दीआ लेकर पिंजरेके निकट गया तो देखा कि तोतेने किसी प्रकार पिंजरेसे बाहर निकलके छोटी चिड़िया के पिंजरेमें पञ्जा डालकर उसको अपनी ओर खींच टुकड़े २ कर दिया है ।
स्वाद — एक तोता था उसके पिंजरेमें भूलकर कुछ खराब रोटी रखी गई तोता रोटीकी ओर कुछ कालतक देखता रहा एक दो बार उसको चक्खा । अच्छा न जानकर रोटी नहीं खाई । चोंचसे इधर उधर बिखेर दिया कहने लगा कि, भ्रष्ट भोजन है भ्रष्ट भोजन है भ्रष्ट नष्ट भोजन है ।