भारतकोश
कबीर मन्शूर (स्वसंवेदार्थ प्रकाश)

कबीर मन्शूर (स्वसंवेदार्थ प्रकाश)

Kabir Manshoor (Svasamvedarth Prakash)

कबीर साहेब द्वारा

स्रोत: कबीर मन्शूर स्वसंवेदार्थ प्रकाश · खेमराज श्रीकृष्णदास (उद्गम)

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पृष्ठ 997

समय नानक साहब यमन आबाद नामक बस्ती जो इस समय गुजराँ बालाके निकट है, वहाँ पर आपका मलिक भागू नाम करोरी खत्री मिला । उसने नानकजीसे कहा कि, आज मेरे पिताके श्राद्धका दिन है, आप मेरे घर भोजन कीजिये नानक साहबने कहा कि, यह भोजन तुम्हारे पिताको पहुँच गया, उस खत्रीने उत्तर दिया कि, महाराज ! ब्राह्मण वचनानुसार तो अवश्य पहुँच गया नानक साहबने कहा कि, असज्जनोंको कदापि नहीं पहुँचता तेरा पिता भेड़ियाकी योनिमें गया है, यहाँसे पांचकोसपर अमुक स्थानमें तीन दिनका भूखा प्यासा झाड़ीमें बैठ आ हुआ है । खत्रीने कहा कि मैं इस बातका कैसे विश्वास करूँ ? नानक साहबने कहा कि, तू भोजन लेकर उसके पास जा, वह भोजन करेगा तेरे साथ मानुषिक भाषामें बातचीत करेगा । नानक साहबकी आज्ञानुसार खत्री भोजन लेकर वहाँ पहुँचा वहाँ भेड़िया मिला उसने खूब पेटभर भोजन किया । पेट भर खाने पर भेड़ियेने खत्रीके पूछनेसे कहा कि, मैं अमुक खत्री हूँ । एक वैष्णवके उपदेश मैंने मांस खाना त्याग दिया था । एक समय बीमार पड़ा उस समय मेरा पड़ोसी मांस पकाता था, मेरे नाकमें उसके मसालेकी गन्ध पहुँची, मेरा मन मांस पर चल गया, इतनेही मैं मेरे प्राण निकल गये । मांस खानेके सकलपसे मैं भेड़िया हो गया । फिर वही खत्री नानकसाहबका उपदेश लेकर भक्त हो गया ।

कबसे—जम्बूद्वीपके भरतखण्डको भारतवर्ष भी कहते हैं । यह देश पृथिवीके सभी प्रदेशोंसे उत्तम है । भारत वर्षके चारों ओर मुसलमान म्लेच्छोंकी बस्ती है, किसीकी भी ऐसी श्रेष्ठता नहीं है । भारतमें दयाका पूर्ण प्रचार होनेके कारण, यह सर्वोत्कृष्ट एवं सर्व गुण सम्पन्न हुआ है । शोककी बात है कि, मुसलमानोंके राज्य कालसे भारतमें भी मांस भक्षणका प्रचार और बढ़ गया जो दिन २ बढ़ता ही जाता है ।

हानिके कारण—दया कम हो गयी, लोगोंके अन्तःकर अशुद्ध हो गये । भक्ति लुप्त हो गई । साधु सेवा और सच्ची गुरु भक्तीका चिह्न भी नहीं मिलता, ऊपरसे गुरु भक्ति सेवाकी दिखावट और दम्भसे धर्मकी पुकार थोड़ी बहुत रह गई है । देखें आगे क्या होता है, शोक ! ज्ञान, भक्ति और मुक्ति आदि सत्य पदार्थकी खोजको भूलकर भारतवासियोंने मांस और शराब तथा नाना प्रकारके निषिद्ध मादक पदार्थोंको ग्रहण कर लिया है

उपदेश—परमात्माके सब गुणोंमें श्रेष्ठ गुण दयालुता और कृपालुता है सब मनुष्य तथा अन्य जीवधारी उसी दया और कृपाका आसरा रखते हैं । यदि वह कृपा न करे तो ऋषि, मुनि, पीर, पैगम्बर, साधु, महात्मा कोई भी न छूटें