भारतकोश
करूँ जगत से न्यार

करूँ जगत से न्यार

Karun Jagat Se Nyaar

सतगुरु मधु परमहंस जी द्वारा

स्रोत: साहिब बंदगी आध्यात्मिक संस्थान · साहिब बंदगी (उद्गम)

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देगा । सद्गुरु परमात्मा को प्रगट कर देता है । ऐसी गारंटी पहले किसी ने नहीं दी। किसी ने पहले ऐसा कुछ नहीं कहा। सत्य तक पहुँचने के लिए सद्गुरु की ज़रूरत पड़ेगी - ही पड़ेगी । सद्गुरु यानी एक पूर्ण गुरु । सगुण-निर्गुण में यदि गुरु पहुँचा हुआ भी है, तो भी सदा के लिए हमें भवसागर से छुटकारा नहीं दिला सकता है । क्योंकि उसकी पहुँच निरंजन तक ही होगी । सगुण-निर्गुण भक्ति में गुरु जो नाम देता है, वो सार नाम नहीं होता, वो काया से जपने वाला नाम होता है, वो 52 अक्षर की सीमा में आ जाता है, इसलिए उसे पाकर जीव कतई अमर - लोक नहीं पहुँच सकता है। हाँ, स्वर्ग लोक, ब्रह्म लोक, निरंजन लोक आदि की प्राप्ति हो सकती है और थोड़ी देर के लिए मुक्ति भी मिल सकती है, पर कर्मों के क्षीण होने पर फिर मृत्युलोक में आना पड़ता है, सदा के लिए छुटकारा नहीं मिल पाता। जो कहा जाता है कि भगवान ने फलाने को मुक्ति दे दी, वो इन्हीं मुक्तियों की बात होती है, जो निरंजन की सीमा में आती हैं, जिन्हें पाकर जीव सदा के लिए काल के जाल से मुक्त नहीं हो पाता । अमर-लोक ले जाने के लिए सद्गुरु के सच्चे नाम (विदेह नाम, सार नाम, निःशब्द ) की ज़रूरत पड़ती है । वहाँ अपनी कमाई से, अपने ज़ोर से कतई नहीं पहुँचा जा सकता है । वहाँ पहुँचने के लिए सद्गुरु की कृपा की आवश्यकता होती है। पहले तो वो नाम की ताक़त उसे वहाँ पहुँचा ही देगी। पर यदि कहीं बीच में अटक गये तो फिर सद्गुरु की कृपा की ज़रूरत पड़ती है । निरंजन और माया किसी भी जीव को इस ब्रह्माण्ड से परे नहीं जाने देते हैं । वो तो किसी को अन्दर की दुनिया में भी नहीं जाने देना चाहते। अनेक बाधाएँ डालकर जीव को भ्रमित कर देते हैं । फिर निरंजन की सीमा से पार जाने का तो प्रश्न ही नहीं उठता। वहाँ निरंजन और माया पूरी ताक़त लगाकर जीव को खींचते हैं। करोड़ों प्रयत्न करने पर भी जीव वहाँ से पार नहीं हो सकता है। सद्गुरु जीव को अपनी शक्ति देकर पार करता है । तभी तो कहा है

केते पढ़ि गुनि पचि मुए, योग यज्ञ तप लाय ।

बिन सतगुरु पावे नहीं, कोई कोटिन करे उपाय ।।