करूँ जगत से न्यार
Karun Jagat Se Nyaar
सतगुरु मधु परमहंस जी द्वारा
स्रोत: साहिब बंदगी आध्यात्मिक संस्थान · साहिब बंदगी (उद्गम)
पृष्ठ 233, कुल 264 में से
संदर्भ में पढ़ेंपाखण्डियों से बचना
इस तीन लोक में सभी काल - पुरुष की भक्ति कर रहे हैं।
गण गन्धर्व ऋषि मुनि अरु देवा, सब मिल लाग निरंजन सेवा ।।
आख़िर दुनिया के लोग ग़लत भक्ति में क्यों लगे हैं? कुछ कारण तो होगा!
अगर हम अपने आस-पास देखें तो एक बात ज़ाहिर होती है कि सभी ग़लत भक्तियों में लगे हैं । कोई पेड़ों की, कोई नदियों की, कोई पत्थरों की भक्ति कर रहा है। आख़िर इंसान ने ग़लत तरह की भक्तियाँ क्यों कीं ? इसमें आदमी का दोष नहीं है। आदमी को ग़लत भक्ति में लगाया गया। कुछ लोगों ने अपने हितों के लिए ऐसा किया। यदि कोई किसी पहाड़ पर कोई मूर्ति गाड़कर कह देता है कि फलाने पहाड़ पर त्रेता युग की मूर्ति निकल आयी है तो पूरी दुनिया वहाँ जुट जाती है। वो कहते हैं कि यहाँ माथा टेको तो सब कार्य पूरे हो जायेंगे। ऐसे ही लोग किसी की समाधि बनाकर कहते हैं कि फलाने का स्थान है। पास में कोई छपड़ी बना देते हैं। नाटक है कि जो यहाँ नहायेगा, उसकी खुजली ख़त्म हो जायेगी, रोग ख़त्म हो जायेंगे । आदमी को वैसे भी बीमारियाँ ज़्यादा लगी हुई हैं, इसलिए कई पहुँच जाते हैं । फिर पानी तो इतना गन्दा होता है कि यदि कोई अच्छा भला भी हो, वो भी बीमार हो सकता है । पर दुनिया कहाँ मानती है ! दो डुबकियाँ लगाती है, पैसा चढ़ाती है समाधि पर और घर आ जाती है | विचार तो कोई करता ही नहीं । कोई यह नाटक समझने का प्रयास नहीं करता। यही है अपने स्वार्थ में, ग़लत भक्ति में लगाना । इसी बहाने पाखण्डी लोग धन इकट्ठा करते हैं। पूरे समाज को स्वार्थियों ने भटका दिया है, इन्हीं चीज़ों में । 'खरे सयाने सबही भटके, तीन लोक में सबही अटके।' इन चीज़ों का प्रचार भी ज़ोरदार है । लोग भोले भाले हैं; उन्हें भ्रमित किया जाता है।