करूँ जगत से न्यार
Karun Jagat Se Nyaar
सतगुरु मधु परमहंस जी द्वारा
स्रोत: साहिब बंदगी आध्यात्मिक संस्थान · साहिब बंदगी (उद्गम)
पृष्ठ 235, कुल 264 में से
संदर्भ में पढ़ेंकहा-इधर भी नज़र डालो । वहाँ मखमल का कपड़ा डाला था। मैंने सोचा कि कीमती सामान होगा; कहा-उठा कपड़ा । जैसे ही उसने कपड़ा उठाया, मुझे फौज की याद आ गयी । फौज में जहाँ लड़ने जाना हो, उसके लिए छोटी- छोटी पहाड़ियाँ बना लेते हैं। वहाँ भी ऐसी ही पहाड़ियाँ बनी थीं। मैंने पूछा- क्या है? कहा-मेरे दादे की हत्या है। मैंने कहा- यह तो सिनक है। उसने कहा- नहीं ! नहीं ! हत्या है। मिटाओ तो और हो जाती है । सिनक नुक़सानकारक है । इसका घर तोड़ो तो जल्दी बना लेती है । अगली बार मजबूत बनाती है। पर सयाना तो वहाँ आकर ढोल बजाता था, बुद्धू बनाकर पैसे लूटता था । मैंने सोचा, यदि इसे कहूँगा कि हटा तो यह नहीं समझेगा, क्योंकि सयाने ने इसे खूब वहम में डाला हुआ है। इसलिए कहा- गुरुवार के दिन 5 से 6 बजे के बीच में साहिब का नाम लेकर हटा देना । ..इसी तरह पाखण्डी तपके ने सब मत-मतान्तरों को भी ख़त्म कर दिया। अन्य पंथों के लोग सब काम कर रहे हैं, वहम में है । मुझसे भी तो पाखण्डी यही कह रहे हैं कि चंदा भी देने दो अपने लोगों को, हत्या भी मनाने दो, तब ठीक है । फिर नहीं करेंगे आपकी निन्दा | पाखंडी बड़े दाँव लगायेंगे। वो आपको भक्ति से हटाने के लिए किसी भी हद तक जा सकते हैं। उनसे बचना। पाखंडी आपको कसौटी पर खड़ा करेंगे। वो आपका विरोध भी जमकर करेंगे। पर आप दृढ़ रहना । | आपको कसौटी पर खड़ा किया जायेगा यह दुनिया बड़ी ही ज़ालिम है । परम - पुरुष की सत्य-भक्ति में को लाने के लिए मुझे बड़ा ही संघर्ष करना पड़ता है, क्योंकि काल - पुरुष का संसार है, जीव आसानी से आता नहीं है । फिर जो भूले-भटके इस भक्ति में पहुँचते हैं, दुनिया उन्हें भी इस भक्ति से हटाने में लगी रहती है । हमारे नामी को कहीं ठोकर भी लग जाए तो कहते हैं कि बड़े साहिब बंदगी, साहिब बंदगी करते रहते हो; देखा न, लगी न ठोकर । लो, कर लो अब बात! सुख-दुख से भरी इस दुनिया में कसौटी