भारतकोश
कौटिलीय अर्थशास्त्रम् (सटीक - डॉ. वाचस्पति गैरोला)

कौटिलीय अर्थशास्त्रम् (सटीक - डॉ. वाचस्पति गैरोला)

Kautiliya Arthashastra with Hindi Commentary by Gairola

आचार्य कौटिल्य (चाणक्य) / डॉ. वाचस्पति गैरोला द्वारा

DevanagariSanskritpublished918 पृष्ठ

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प्र० ९१ : अ० ३ ] भृत्यों का भरण-पोषण ४२१

(१) श्रेणीमुख्या हस्त्यश्वरथमुख्याः प्रदेष्टारश्च अष्टसाहस्राः । स्वव- र्गानुकर्षणो ह्येतावता भवन्ति । (२) पत्त्यश्वरथहस्त्यध्यक्षाः द्रव्यहस्तिवनपालाश्च चतुःसाहस्राः । (३) रथिकानीकस्थचिकितसकाश्वदमकवर्धकयो योनिपोषकाश्च द्वि- साहस्राः । (४) कार्तान्तिकनैमित्तिकमौहूर्तिकपौराणिकसूतमागधाः पुरोहित- पुरुषाः सर्वाध्यक्षाश्च साहस्राः । (५) शिल्पवन्तः पादाताः संख्यायकलेखकादिवर्गाः पञ्चशताः । (६) कुशीलवास्त्वर्धतृतीयशताः । द्विगुणवेतनाश्चैषां तूर्यकराः । (७) कारुशिल्पिनो विंशतिशतिकाः । (८) चतुष्पदद्विपदपरिचारकपारिकर्मिकौपस्थायिकपालकविष्टिवन्ध- काः षष्टिवेतनाः ।


माता ), सूबेदार मेजर ( नायक ), शहर कोतवाल ( पौर ), व्यापार का अध्यक्ष ( व्यावहारिक ) कृषि आदि का अध्यक्ष ( कर्मांतिक ), मंत्रिपरिषद के पूर्वोक्त बारह सदस्य, पुलिस सुपरिटेंडेण्ट ( राष्ट्रपाल ) और सीमा-निरीक्षक ( अन्तपाल ), इनको बारह हजार पण वेतन प्रति वर्ष दिया जाय । इतना वेतन देने से ये लोग सदा राजा के अनुकूल बने रहेंगे और उसकी सहायता के लिए हर समय तैयार रहेंगे ।

( १ ) इंजीनियर ( श्रेणीमुख्य ), हाथी-घोड़े-रथों के अध्यक्ष और कंटक शोधन अधिकारी ( प्रदेष्टा ), इनको आठ सौ पण वार्षिक वेतन दिया जाय । इतना वेतन दिये जाने पर ये अपने वर्ग ( डिपार्टमेंट ) के कर्मचारियों के सदा अनुकूल बने रहेंगे ।

( २ ) पैदल सेना का अध्यक्ष, अश्वसेना, रथसेना तथा गजसेना के अध्यक्ष और लकड़ी-हाथियों के जंगल के अध्यक्षों को चार हजार पण प्रतिवर्ष वेतन दिया जाय ।

( ३ ) रथ-शिक्षक, गज-शिक्षक, चिकित्सक, अश्व-शिक्षक और मुर्गा, सूअर आदि के पालने वालों का अध्यक्ष, इन सब को दो हजार पण वार्षिक दिया जाय ।

( ४ ) सामुद्रिक ( कार्तान्तिक ), सकुन बताने वाले ( नैमित्तिक ) ज्योतिषी, कथावाचक, स्तुति-वाचक ( मागध ), पुरोहित के नौकर और सुरा आदि के अध्यक्ष, इनको एक हजार वेतन प्रतिवर्ष दिया जाय ।

( ५ ) चित्रकार, पादाता ( खिलाड़ी ), गणक ( संख्यायक ) और लेखक वर्ग के कर्मचारियों को पाँच सौ पण प्रतिवर्ष दिया जाय ।

( ६ ) कुशीलव ( नट, नर्तक, गायक ) आदि को ढाई सौ पण और उनमें जो अच्छा बाजा बजाता है, उन्हें पाँच सौ पण वेतन प्रतिवर्ष दिया जाय ।

( ७ ) दूसरे साधारण कारीगरों को एक सौ बीस पण वेतन दिया जाय ।

( ८ ) वेटनरी डाक्टर, डाक्टर या सिविल सर्जनों, परिचारक, गोरक्षक ( ग्वालों ) और वेगारियों ( विष्टिबंधक ) आदि को ६० पण वार्षिक वेतन दिया जाय ।

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