भारतकोश
किरातार्जुनीयम् (घण्टापथ व सुधा टीका सहित)

किरातार्जुनीयम् (घण्टापथ व सुधा टीका सहित)

Kiratarjuniyam of Bharavi Hindi

महाकवि भारवि द्वारा

स्रोत: Kiratarjuniyam with Ghantapath & Sudha Hindi Commentary by Sheshraj Sharma (उद्गम)

DevanagariHindipublished707 पृष्ठ

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चतुर्थः सर्गः

कोषः—'तोयोत्थितं तत्पुलिनं संकतं सिकतामयम्' इत्यमरः।
**हिन्दी—**अर्जुन प्रति-दिन क्षीण होने से धीमे बहाववाली, लहरों से रेखा बनानेवाली, नदियों के भङ्गिमायुक्त क्षौमवस्त्र के समान उज्ज्वल रेतीले तट को देखकर अतीव प्रसन्न हुए ॥ ६ ॥

मनोरमं प्रापितमन्तरं भ्रुवोरलङ्कृतं केसररेणुनाऽणुना।
अलक्तताम्राधरपल्लवश्रिया समानयन्तीमिव बन्धुजीवकम् ॥ ७ ॥

**अन्वयः—**अणुना केसररेणुना अलङ्कृतं मनोरमं भ्रुवोः अन्तरं प्रापितं बन्धुजीवकम् अलक्तताम्राधरपल्लवश्रिया समानयन्तीम् इव।

**विग्रहः—**केसरस्य रेणुः केसररेणुस्तेन = केसररेणुना। अलक्तवत् ताम्रस्य अधरपल्लवस्य या श्रीस्तया = अलक्तताम्राधरपल्लवश्रिया।

**अर्थः—**अणुना = सूक्ष्मेण। केसररेणुना = किञ्जल्कपरागेण। अलङ्कृतम् = शोभितम्। मनोरमम् = सुन्दरम्। भ्रुवोः अन्तरम् = भ्रूमध्यम्। प्रापितम् = निवेशितम्। बन्धुजीवकम् = बन्धूकपुष्पम्। अलक्तताम्राधरपल्लवश्रिया = लाक्षारस-रक्ताधरपल्लवकान्त्या समानयन्तीम् = समोकुर्वतीम्। इव = समम्। 'अत्रोत्प्रेक्षा-लंकारः।

कोषः—'किञ्जल्कः केसरोऽस्त्रियाम्' इत्यमरः।
**हिन्दी—**धान के खेत रखाती हुई स्त्रियों ने सूक्ष्म केसररेणु से अलङ्कृत मनोरम जवाकुसुम को भौहों के मध्य में लगा रखा था। इस प्रकार पुष्पयुक्त भौहें महावर की लालिमा से रञ्जित अधर पल्लवों की मानों बराबरी कर रही थी ॥ ७ ॥

नवातपालोहितमाहितं मुहुर्महानिवेशौ परितः पयोधरौ।
चकासयन्तीमरविन्दजं रजः परिश्रमाम्भःपुलकेन सर्पता ॥ ८ ॥

**अन्वयः—**महानिवेशौ पयोधरौ परितः मुहुः आहितम् नवातपालोहितम् अरविन्दजं रजः सर्पता परिश्रमाम्भःपुलकेन चकासयन्तीम्।

**विग्रहः—**महान् निवेशो ययोस्तौ = महानिवेशौ। पयसां धरौ तौ = पयोधरौ। नवेन आतपेन आलोहितं तत् = नवातपालोहितम्। अरविन्दाज्जातम् सत् = अरविन्दजम्। परिश्रमाज्जातमम्भः = परिश्रमाम्भः, तस्य पुलकस्तेन = परिश्रमाम्भःपुलकेन।