कुलार्णव तन्त्र (हिन्दी व्याख्या सहित)
Kularnava Tantra with Hindi Commentary
भगवान शिव / पं. भद्रशील शर्मा द्वारा
स्रोत: कल्याण मन्दिर प्रयाग · कल्याण मन्दिर प्रयाग · 1950 (उद्गम)
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संदर्भ में पढ़ेंभूमिका 'कुलार्णव तन्त्र' की गणना आगम ग्रन्थों में हुई है। अतः इसका महत्व यहाँ स्पष्ट करने का आवश्यकता नहीं है। किन्तु यह अवश्य उल्लेखनीय है कि यह तन्त्र कौलधर्म के सिद्धान्तो की स्पष्ट अभिव्यक्ति करने में अग्रगण्य है। इससे इसकी उपयोगिता बहुत अधिक मानी गई है और सभी साधक बड़े आदर के साथ इसका मनन किया करते हैं। इसके सत्रह उल्लासों में विविध विषयों का जो विवेचन किया गया है, वह बहुत कुछ सूत्रात्मक है। उसका स्पष्टीकरण सुचारु रूप से करना अधिकारी विद्वानों का काम है। इन पंक्तियों का लेखक न तो विद्वान् है और न ही ऐसे महत्त्वपूर्ण ग्रन्थ की रहस्यपूर्ण उक्तियों की व्याख्या करने का अधिकारी है। उसने किसी प्रकार इस ग्रन्थ का सारांश हिन्दी भाषा में लिखकर अध्यात्म प्रेमियों के समक्ष इस उद्देश्य से प्रस्तुत किया है कि वे इस अनूठे आगम साहित्य की विशेषता को अनुभव करें और अधिकारी विद्वानों से इसकी बातों को विस्तार के साथ समझने को सचेष्ट हों। बहुत संभव है कि एक ओर अपनी अल्पज्ञता और दूसरी ओर विषय की रहस्यात्मकता के कारण लेखक ने सारांश प्रस्तुत करने में कहीं कुछ त्रुटियाँ भी की हों। इसके लिये वह क्षमाप्रार्थी है और आशा करता है कि जो पाठक बन्धु