संक्षिप्त कूर्मपुराण

संक्षिप्त कूर्मपुराण
Kurma Purana
महर्षि वेदव्यास द्वारा
DevanagariHindipublished506 पृष्ठ
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| अध्याय | विषय | पृष्ठ-संख्या | अध्याय | विषय | पृष्ठ-संख्या |
|---|---|---|---|---|---|
| आख्यान, सुशीलको हिमालयके 'धर्मपद' नामक वनमें महापाशुपत श्वेताश्वतर मुनिके दर्शन तथा उनसे पाशुपत-व्रतका ग्रहण, दक्षके पूर्वजन्मका वृत्तान्त तथा पुनः दक्ष प्रजापतिके रूपमें आविर्भावकी कथा, दक्षद्वारा शंकरका अपमान, सतीद्वारा देह-त्याग तथा शंकरका दक्षको शाप................................. | ९१ | वर प्राप्त करना, अदितिके गर्भमें विष्णुका प्रवेश, विष्णुका वामनरूपमें आविर्भाव, बलिके यज्ञमें वामनका प्रवेश तथा तीन पग भूमिकी याचना, तीसरे पगसे नापते समय ब्रह्माण्ड-भेदन, गङ्गाकी उत्पत्ति तथा भक्तिका वर प्राप्तकर बलि आदिका पातालमें प्रवेश ..................................... | १२२ | ||
| १४- | हरिद्वारमें दक्षद्वारा यज्ञका आयोजन, यज्ञमें शंकरका भाग न देखकर महर्षि दधीचिद्वारा दक्षकी भर्त्सना तथा यज्ञमें भाग लेनेवाले ब्राह्मणोंको शाप, देवी पार्वतीके कहनेपर शंकरद्वारा रुद्रों, भद्रकाली तथा वीरभद्रको प्रकट करना, वीरभद्रादिद्वारा दक्षके यज्ञका विध्वंस, शंकर-पार्वतीका यज्ञस्थलमें प्राकट्य, भयभीत दक्षद्वारा शंकर तथा पार्वतीकी स्तुति और वर प्राप्त करना, ब्रह्माद्वारा दक्षको उपदेश और शिव-विष्णुके एकत्वका प्रतिपादन तथा दक्षद्वारा शिवकी शरण ग्रहण करना................................. | ९६ | १७- | बलिपुत्र बाणासुरका वृत्तान्त, दक्ष प्रजापतिकी दनु, सुरसा आदि कन्याओंकी संतानोंका वर्णन ............................................... | १२८ |
| १८- | महर्षि कश्यप तथा पुलस्त्य आदि ऋषियोंके वंशका वर्णन, रावण तथा कुम्भकर्ण आदिकी उत्पत्ति, वसिष्ठके वंश-वर्णनमें व्यास, शुकदेव आदिकी उत्पत्तिकी कथा, भगवान् शंकरका ही शुकदेवके रूपमें आविर्भूत होना....... | १२९ | |||
| १९- | सूर्यवंश-वर्णनमें वैवस्वत मनुकी संतानोंका वर्णन, युवानाश्वको गौतमका उपदेश, महातपस्वी राजा वसुमनाकी कथा, वसुमनाके अश्वमेध-यज्ञमें ऋषियों तथा देवताओंका आगमन, ऋषियोंद्वारा तपस्याकी आज्ञा प्राप्तकर वसुमनाका हिमालयमें जाकर तप करना और अन्तमें उसे शिवपदकी प्राप्ति......... | १३१ | |||
| १५- | दक्ष-कन्याओंकी संतति, नृसिंहावतार, हिरण्यकशिपु एवं हिरण्याक्ष-वधका वर्णन, पृथ्वीका उद्धार, प्रह्लाद-चरित, गौतमद्वारा दारुवननिवासी मुनियोंको शाप, अन्धकके साथ महादेवका युद्ध एवं महादेवद्वारा अपने स्वरूपका उपदेश, अन्धकद्वारा महादेवकी स्तुति तथा महादेव (शंकर)-द्वारा अन्धकको गाणपत्य-पदकी प्राप्ति, अन्धकद्वारा देवीकी स्तुति और देवीद्वारा अन्धकको पुत्र-रूपमें ग्रहण करना तथा विष्णुद्वारा उत्पन्न माताओंसे अपनी तीनों मूर्तियोंका प्रतिपादन .................................... | १०४ | २०- | इक्ष्वाकु-वंश-वर्णनके प्रसंगमें श्रीराम-कथाका प्रतिपादन, श्रीरामद्वारा सेतु-बन्धन और रामेश्वर-लिंगकी स्थापना, शंकर-पार्वतीका प्रकट होकर रामेश्वर-लिंगके माहात्म्यको बतलाना, श्रीरामको लव-कुश पुत्रोंकी प्राप्ति तथा इक्ष्वाकु-वंशके अन्तिम राजाओंका वंश-वर्णन .............................................. | १३७ |
| १६- | सनत्कुमारद्वारा आत्मज्ञान प्राप्तकर प्रह्लाद-पुत्र विरोचनका योगमें संलग्न होना, विरोचन-पुत्र बलिद्वारा देवताओंको पराजित करना, देवमाता अदितिका दुःखी होना तथा विष्णुसे प्रार्थनाकर पुत्ररूपमें उनके उत्पन्न होनेका | २१- | चन्द्रवंशके राजाओंका वृत्तान्त, यदुवंश-वर्णनमें कार्तवीर्यार्जुनके पाँच पुत्रोंका आख्यान, परम विष्णुभक्त राजा जयध्वजकी कथा, विदेह दानवका पराक्रम तथा जयध्वजद्वारा विष्णुके अनुग्रहसे उसका वध, विश्वामित्रद्वारा विष्णुकी आराधनाका जयध्वजको उपदेश करना और |