भारतकोश
माधव निदान (मधुकोश व्याख्या व हिन्दी अनुवाद सहित)

माधव निदान (मधुकोश व्याख्या व हिन्दी अनुवाद सहित)

Madhava Nidana with Madhukosha & Hindi Translation

माधवकर द्वारा

स्रोत: खेमराज श्रीकृष्णदास · खेमराज श्रीकृष्णदास (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished404 पृष्ठ

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पृष्ठ 266

( २४८ ) माधवनिदान । देह कृश होजाय, बल नाश होजाय, नाक बैठ जाय, अग्नि मन्द हो जाय, हड्डी सूखे तथा हड्डी टेढी हो जाय, ये फिरंगके उपद्रव हैं ॥ साध्यासाध्य कष्टसाध्य । बहिर्भवो भवेत्साध्यो नूतनो निरुपद्रवः । आभ्यन्तरस्तु कष्टेन साध्यः स्यादयमामयः ॥ ७ ॥ बहिरंतर्भवो जीर्णः क्षीणस्योपद्रवैर्युतः । बोध्यो व्याधिरसाध्योऽमित्यूचुर्मुनयः पुरा ॥ ८ ॥ जो फिरंग बाहर होय, नया और उपद्रवरहित होय वह साध्य है और भीतर होय वह कष्टसाध्य है और जो बाहर भीतर दोनों ठिकानेपर होय तथा पुराना पडजाय और उपद्रवयुक्त होय, वह फिरंगरोग असाध्य है ॥ इति श्रीपण्डितदत्ताराममाथुरप्रणीतमाधवार्थबोधिनीमाथुरीभाषाटीकायां फिरंगरोगनिदानं समाप्तम् ॥ अथ शूकरोगनिदानम् । —❖❖❖❖— अक्रमाच्छेफसो वृद्धिं योऽभिवाञ्छति मूढधीः । व्याधयस्तस्य जायन्ते दश चाष्टौ च शूकजाः ॥ १ ॥ जो मन्दबुद्धिवाला पुरुष शास्त्रोक्त क्रमके बिना लिंगको मोटा करा चाहै वह विषकृमिका लिंगके ऊपर लेपादिक करे अथवा जलयोग वात्स्यायनऋषिके कहे उनका साधन करे उसके १८ प्रकारके शूकरोग होते हैं ॥ सर्षपिकाके लक्षण । गौरसर्षपसंस्थाना शूकदुर्भगहेतुका । पिडिका श्लेष्मवाताभ्यां ज्ञेया सर्षपिका च सा ॥ २ ॥ दुष्टजलजन्तुका दुष्टरीतिसे लेप करनेसे कफ, वात कुपित होकर सफेद सरसोंके समान जो पिडिका ( फुन्सी ) होय उसको सर्षपिका कहते हैं ॥ अष्ठीलाके लक्षण । कठिना विषमर्भुग्नैर्वायुनाऽष्ठीलिका भवेत् । अप्रसक्त शूकोंके लेपसे वायु कुपित होकर करडी निहाईके समान पिडिका होय और विषम कहिये कोई छोटी और कोई बडी और भुग्न कहिये टेढे ऐसे शूक कहिये मांसांकुरोंसे व्याप्त होय उसको अष्ठीला कहते हैं ॥

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