भारतकोश
माधव निदान (मधुकोश व्याख्या व हिन्दी अनुवाद सहित)

माधव निदान (मधुकोश व्याख्या व हिन्दी अनुवाद सहित)

Madhava Nidana with Madhukosha & Hindi Translation

माधवकर द्वारा

स्रोत: खेमराज श्रीकृष्णदास · खेमराज श्रीकृष्णदास (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished404 पृष्ठ

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पृष्ठ 76

( ५८ ) माधवनिदान । कहते हैं, जो नासिका आदिमें होय उसको अधिमांस कहते हैं, क्योंकि नासिका आदिमें जो बवासीर होती है उसमें पूर्वरूपके लक्षण नहीं मिलते हैं ॥ वातकी बवासीरके कारण । कषायकटुतिक्तानि रूक्षशीतलघूनि च । प्रमिताल्पाशनं तीक्ष्णं मद्यं मैथुनसेवनम् ॥ ३ ॥ लंघनं देशकालौ च शीतौ व्यायाम- कर्म च । शोको वातातपस्पर्शं हेतुर्वातार्शसां मतः ॥ ४ ॥ कसैला, कडुवा, तीखा, रूखा, शीतल और अतिलघु ऐसे पदार्थोंके खानेसे तथा अति थोडा खानेसे, भोजनकालके उल्लंघन करनेसे, तीव्र मद्यके पान करनेसे, अत्यन्त मैथुन ( स्त्रीसंग ) करनेसे, उपवास, शीतदेश और शीतकाल ( हेमन्तादिकृतु ) दंड कसरतसे, शोकसे, हवा घाममें डोलनेसे ये वातकी बवासीर होनेके कारण हैं ॥ पित्तकी बवासीरके कारण । कट्वम्ललवणोष्णानि व्यायामाग्न्यातपश्रमाः । देशकालावाशिशिरौ क्रोधो मद्यमसूयनम् ॥ ५ ॥ विदाहि तीक्ष्णमुष्णं च सर्वं पानान्नभेषजम् । पित्तोल्वणानां विज्ञेयः प्रकोप हेतुर्शसाम् ॥ ६ ॥ तीखा, खट्टा, लवणका, गरम ऐसे पदार्थोंसे, दण्ड कसरतसे, अग्निके समीप तथा घाममें रहनेसे, श्रम, गरम देश ( मारवाड आदि ) और उष्णकाल अर्थात् ग्रीष्मऋतु, क्रोध, मद्यपान, परद्रव्य देखकर जलना, दाहकारक, तीखी, गरम वस्तुका पीना, अन्नका और गरम औषधिका सेवन ये सब पित्ताधिक बवासीरके कारण हैं ॥ कफकी बवासीरके कारण । मधुरस्निग्धशीतानि लवणाम्लगुरूणि च । अव्यायामदिवास्वप्न- शय्यासनसुखे रतिः ॥ ७ ॥ प्राग्वातसेवा शीतौ च देशकाला- वचिन्तनम् । श्लेष्मोल्वणानामुद्दिष्टमेतत्कारणमर्शसाम् ॥ ८ ॥ मीठा, चिकना, शीतल, खारी, खट्टा, भारी ऐसे भोजनसे, व्यायामके न करनेसे, दिनमें सोनेसे, सेज, गद्दी इनके सेवन करनेसे, पूर्वकी हवा खानेसे, शीतल देश, शीतकाल, चिन्तारहित होनेसे ये कफकी बवासीर होनेके हेतु हैं ॥ द्वंद्वज बवासीरके कारण । हेतुलक्षणसंसर्गाद्विद्याद्द्वन्द्वोल्वणानि च । दो दो दोषोंके कारण और लक्षण मिले तो द्वंद्वजबवासीर हुई है ऐसे जाने ॥