माधव निदान (मधुकोश व्याख्या व हिन्दी अनुवाद सहित)

माधव निदान (मधुकोश व्याख्या व हिन्दी अनुवाद सहित)
Madhava Nidana with Madhukosha & Hindi Translation
माधवकर द्वारा
स्रोत: खेमराज श्रीकृष्णदास · खेमराज श्रीकृष्णदास (उद्गम)
DevanagariSanskritpublished404 पृष्ठ
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विषयानुक्रमणिका। ( ७ )
| विषय. | पृष्ठांक. | विषय. | पृष्ठांक. |
|---|---|---|---|
| अपस्मारनिदानम् । | साध्यासाध्यके ज्ञानार्थ और दोषोंका सम्बन्ध | १४७ | |
| अपस्मार रोगकी निरुक्ति | १३६ | अर्दितरोगके लक्षण | " |
| अपस्मारकी निदानपूर्वक सम्प्राप्ति | " | अर्दितरोगके असाध्य लक्षण | १४८ |
| वाग्भटके मतसे निदान | " | आक्षेपकसे लेकर अर्दितपर्यन्त रोगोंका वेग | " |
| अपस्मारके सामान्य लक्षण, पूर्वरूप | १३७ | हनुग्रहके लक्षण | " |
| वातज अपस्मारके लक्षण | " | मन्यास्तम्भके लक्षण, जिह्वास्तम्भके लक्षण | १४९ |
| पित्तकी मृगीके लक्षण | १३८ | शिराग्रहके लक्षण, गृध्रसीके लक्षण | " |
| कफकी मृगीके लक्षण | " | विश्वाचीके लक्षण, कोष्टुशीर्षके लक्षण | १५० |
| सन्निपातकी मृगीके लक्षण | " | खंज और पांगुलेके लक्षण | " |
| मृगीके असाध्य लक्षण | " | कलायखंजके लक्षण, वातकंटकुकके लक्षण | " |
| मृगीरोगकी पाली | १३९ | पादहर्षके लक्षण | १५१ |
| वातव्याधिनिदानम् । | अंसशोष अपबाहुकके लक्षण | " | |
| वातव्याधिकी सम्प्राप्ति | १३९ | मूकादिक तीन रोगोंके लक्षण | " |
| वातव्याधिके पूर्वरूप व लक्षण | १४० | तूनीरोगके लक्षण | " |
| कोष्ठाश्रितवायुके कार्य | १४१ | प्रतूनीके लक्षण, आध्मानरोगके लक्षण | १५२ |
| सर्वांगकुपित वायुके कार्य | " | प्रत्याध्मानके लक्षण, वाताष्ठीलाके लक्षण | " |
| गुदामें स्थित वायुके कार्य | " | प्रत्यष्ठीलाके लक्षण, मूत्रावरोधके लक्षण | १५३ |
| आमाशयस्थित वायुके कार्य | १४२ | कम्पवायुके लक्षण, खल्लीके लक्षण | " |
| पक्वाशयस्थ वायुके कार्य | " | ऊर्ध्ववातके लक्षण | " |
| इन्द्रियोंमें स्थित वायुके कार्य | " | प्रलापके लक्षण, रसाज्ञानके लक्षण | १५४ |
| रसधातुगत वायुके लक्षण | " | अनुक्तवातरोगसंग्रह | " |
| रक्तगतवायुके लक्षण | " | साध्यासाध्य विचार | " |
| मांसमेदोगत वायुके लक्षण | " | वातव्याधिके उपद्रव | " |
| मज्जास्थिगत वायुके लक्षण | १४३ | असाध्य लक्षण | १५५ |
| शुक्रगत वायुके लक्षण | " | प्रकृतिस्थ पंचवायुके लक्षण | " |
| शिरागत वायुके लक्षण | " | वातरक्तनिदानम् । | |
| स्नायुगत और संधिगत वायुके लक्षण | " | वातरक्तकी संप्राप्ति | १५६ |
| पित्त और कफ इनसे आवृत हुई प्राणादिक वायुके लक्षण | " | वातरक्तका पूर्वरूप | " |
| आक्षेपकके सामान्य लक्षण | १४४ | वातरक्तको अन्य दोषोंका संसर्ग होनेसे उसके न्यारे २ लक्षण | १५७ |
| आक्षेपकके दो भेद | " | रक्ताधिकके लक्षण | " |
| दंडागतानकके लक्षण | १४५ | पित्ताधिकके लक्षण | " |
| अन्तरायाम और बहिरायाम इनके साधारण रूप | " | कफाधिकके लक्षण | १५८ |
| अन्तरायामके लक्षण | " | पैरोंमें रोगकी उपेक्षा करनेसे अनेक दोषोंकी उत्पत्ति | " |
| बाह्यायामके लक्षण | १४६ | असाध्य लक्षण | " |
| असाध्यत्व | " | उपद्रव | " |
| पक्षाघातके लक्षण | " | साध्यासाध्यविचार | १५९ |
| सर्वांगरोगेके लक्षण | १४७ |