भारतकोश
माधव निदान (मधुकोश व्याख्या व हिन्दी अनुवाद सहित)

माधव निदान (मधुकोश व्याख्या व हिन्दी अनुवाद सहित)

Madhava Nidana with Madhukosha & Hindi Translation

माधवकर द्वारा

स्रोत: खेमराज श्रीकृष्णदास · खेमराज श्रीकृष्णदास (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished404 पृष्ठ

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भाषाटीकासमेत । (७९) मिट्टी खानेका जिस मनुष्यको अभ्यास पडजाय उसके वातादिक दोष कुपित होवें, कषेली मिट्टीसे वात कुपित होय, खारी मिट्टीसे पित्त और मीठी मिट्टीसे कफ कुपित होवे। फिर वही मिट्टी पेटमें जाकर रसादिक धातुओंको रूखा करे । जब रौक्ष्य गुण प्रगट होजाय तब जो अन्न खाय सो रूखा होजाय । फिर वही मिट्टी पेटमें बिना पके रसको रस बहनेवाली नसोंमें प्राप्त कर उनके मार्गको रोकदे, रसके बहने- वाली नसोंका मार्ग जब रुकजाय तब इन्द्रियोंका बल अर्थात् अपने अपने विषय ग्रहण करनेकी शक्तिका नाश होय, शरीरकी कांति तेज और ओज कहिये सब धातुओंका सार हृदयमें रहता है सो क्षीण होकर पाण्डुरोग प्रगट करे उसमें बल, वर्ण और अग्नि इनका नाश होता है ॥ पांडुके विशेष लक्षण । शूनाक्षिकूटगण्डभ्रूः शूनपन्नाभिमेहनः । कृमिकोष्ठोऽतिसार्येत मलं चासृक्कफान्वितम् ॥ ११ ॥ नेत्र, कपोल, भ्रुकुटी, पैर, नाभि और लिंग इनमें सूजन हो और कोठेमें क्रिमि पडजॉय तथा रुधिर और कफ मिला दस्त उतरे सब पाण्डुरोगोंमें जब पेटमें कृमि पडजॉय हैं तब ये पूर्वोक्त लक्षण होते हैं । यह जैज्जट आचार्यका मत है और कोई कहता है-ये मृत्तिकाजन्य पांडुरोगके लक्षणहैं। क्योंकि, मृत्तिकाजन्य पाण्डुरोगके लक्षण अनन्तर लिखे हैं परन्तु विदेहने तो ये मृत्तिकाजन्य पांडुरोगके लक्षण स्पष्ट कहे हैं ॥ असाध्य पांडुरोगके लक्षण । पाण्डुरोगश्चिरोत्पन्नः खरीभूतो न सिद्ध्यति । कालप्रकर्षा- च्छूनाङ्गो यो वा पीतानि पश्यति ॥ १२ ॥ बद्धालपविट् सह- रितं सकफं योऽतिसार्यते । दीनः श्वेतातिदिग्धाङ्गश्छर्दि- मूर्च्छातृषान्वितः ॥ १३ ॥ स नास्त्यसृक्क्षयाद्यस्तु पाण्डुः श्वेतत्वमाप्नुयात् । पाण्डुदन्तनखो यस्तु पाण्डुनेत्रश्च यो भवेत् ॥ १४॥ पाण्डुसङ्घातदर्शी च पाण्डुरोगी विनश्यति । अन्तेषु शूनं परिहीनमध्यं म्लानं तथा तेषु च मध्यशूनम् ॥ १५ ॥ गुदे च शोफस्यथ मुष्कयोश्च शूनं प्रताम्यं तमसंज्ञकल्पम् । विवर्जयेत्पाण्डुकिनं यशोर्थी तथातिसारज्वरपीडितं च ॥ १६ ॥ बहुत दिनका पांडुरोग बहुत काल बीतनेसे पुराना होजाता है सो अच्छा नहीं होय । अथवा-सब देहमें सूजन आगई होवे और उसको पदार्थ पीले दीखें सो भी