भारतकोश
महाभारत (खंड ४) - द्रोण, कर्ण, शल्य, सौप्तिक व स्त्री पर्व

महाभारत (खंड ४) - द्रोण, कर्ण, शल्य, सौप्तिक व स्त्री पर्व

Mahabharata (Vol 4) - Drona, Karna, Shalya, Sauptika and Stri Parva

महर्षि कृष्णद्वैपायन वेदव्यास द्वारा

DevanagariSanskritpublished3,237 पृष्ठ

पृष्ठ 245, कुल 3237 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 245

⬅ विषय-सूची (TOC)

एकोनत्रिंशोऽध्यायः

अर्जुन और भगदत्तका युद्ध, श्रीकृष्णद्वारा भगदत्तके वैष्णवास्त्रसे अर्जुनकी रक्षा तथा अर्जुनद्वारा हाथीसहित भगदत्तका वध

धृतराष्ट्र उवाच

तथा क्रुद्धः किमकरोद् भगदत्तस्य पाण्डवः ।
प्राग्ज्योतिषो वा पार्थस्य तन्मे शंस यथातथम् ॥ १ ॥

धृतराष्ट्रने पूछा— संजय! उस समय क्रोधमें भरे हुए पाण्डुकुमार अर्जुनने भगदत्तका और भगदत्तने अर्जुनका क्या किया? यह मुझे ठीक-ठीक बताओ ॥ १ ॥

संजय उवाच

प्राग्ज्योतिषेण संसक्तावुभौ दाशार्हपाण्डवौ ।
मृत्युदंष्ट्रान्तिकं प्राप्तौ सर्वभूतानि मेनिरे ॥ २ ॥

संजयने कहा— राजन्! भगदत्तसे युद्धमें उलझे हुए श्रीकृष्ण और अर्जुन दोनोंको समस्त प्राणियोंने मौतकी दाढ़ोंमें पहुँचा हुआ ही माना ॥ २ ॥

तथा तु शरवर्षाणि पातयत्यनिशं प्रभो ।
गजस्कन्धान्महाराज कृष्णयोः स्यन्दनस्थयोः ॥ ३ ॥

शक्तिशाली महाराज! हाथीकी पीठसे भगदत्त रथपर बैठे हुए श्रीकृष्ण और अर्जुनपर निरन्तर बाणोंकी वर्षा कर रहे थे ॥ ३ ॥

अथ कार्ष्णायसैर्बाणैः पूर्णकार्मुकनिःसृतैः ।
अविध्यद् देवकीपुत्रं हेमपुङ्खैः शिलाशितैः ॥ ४ ॥

उन्होंने धनुषको पूर्णरूपसे खींचकर छोड़े हुए लोहेके बने और शानपर चढ़ाकर तेज किये हुए सुवर्णमय पंखयुक्त बाणोंसे देवकीपुत्र श्रीकृष्णको घायल कर दिया ॥ ४ ॥

अग्निस्पर्शसमास्तीक्ष्णा भगदत्तेन चोदिताः ।
निर्भिद्य देवकीपुत्रं क्षितिं जग्मुः सुवाससः ॥ ५ ॥

भगदत्तके चलाये हुए अग्निके स्पर्शके समान तीक्ष्ण और सुन्दर पंखवाले बाण देवकीपुत्र श्रीकृष्णके शरीरको छेदकर धरतीमें समा गये ॥ ५ ॥

तस्य पार्थो धनुश्छित्त्वा परिवारं निहत्य च ।
लालयन्निव राजानं भगदत्तमयोधयत् ॥ ६ ॥

तब अर्जुनने राजा भगदत्तका धनुष काटकर उनके परिवारको मार डाला और उन्हें लाड़ लड़ाते हुए-से उनके साथ युद्ध आरम्भ किया ॥ ६ ॥