भारतकोश
मार्क्सवाद और रामराज्य (स्वामी करपात्री जी महाराज - साम्यवाद समीक्षा एवं वैदिक समाज-दर्शन)

मार्क्सवाद और रामराज्य (स्वामी करपात्री जी महाराज - साम्यवाद समीक्षा एवं वैदिक समाज-दर्शन)

Marxvad aur Ramrajya of Swami Karpatri Maharaj

धर्मसम्राट् स्वामी करपात्री जी महाराज द्वारा

DevanagariHindipublished866 पृष्ठ

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( ६ ) यदि आदिसे अन्ततक किसीने यह पुस्तक सावधानी तथा धैर्यपूर्वक पढ़ी, तो उसे ( आधुनिक वादोंसे प्रच्छन्न ) सत्यका प्रकाश अवश्य मिलेगा । सत्यके अन्वेषक इस पुस्तकके लिये श्रीस्वामीजी महाराजके सदा ऋणी रहेंगे । अस्तु ! गीताप्रेसके संचालकोंने प्रेसमें कार्याधिक्य रहनेपर भी समय निकालकर जल्दीसे यह पुस्तक छापकर वस्तुतः बड़ा ही प्रशंसनीय कार्य किया है । गङ्गातरङ्ग, नगवा, \Bigg} काशी \quad\quad\quad\quad\quad\quad\quad\quad\quad\quad\quad गङ्गाशङ्कर मिश्र महाशिवरात्रि २०१४ वि० \Bigg}

आमुख

नमोऽस्तु रामाय सलक्ष्मणाय देव्यै च तस्यै जनकात्मजायै । नमोऽस्तु रुद्रेन्द्रयमानिलेभ्यो नमोऽस्तु चन्द्रार्कमरुद्गणेभ्यः ॥ ( वाल्मी० सु० १३ । ६० ) आजकल संसारमे दर्शन तथा राजनीतिकी बड़ी चर्चा है, उसमें भी पाश्चात्योंके दर्शन तथा नीतिकी तो बहुत ज्यादा । भारतीय जनताका भी इन दिनो जड विज्ञानके प्रभावसे उधर कम आकर्षण नहीं है। अपनी बात तो हम भूल ही गये । बहुतोंका तो यह अनुमान है कि भारतमे पहले कोई राजनीति-शास्त्र था ही नही । ऐसी दशामें एक ऐसी पुस्तककी बड़ी आवश्यकता थी, जिसमें एक ही साथ पाश्चात्त्य दर्शन, राजनीतिके साथ भारतीय-दर्शनों तथा राजनीतिका तुलनात्मक अध्ययन हो और मूल्य भी कम हो। पाश्चात्योंके दर्शन एवं नीति आदि ग्रन्थ स्वतन्त्र है, साथ ही उनका मूल्य भी अत्यधिक है, जिससे कोई साधारण व्यक्ति उन सबोंको प्राप्त नहीं कर पाता । हमारे सौभाग्यसे परमाराध्य अनन्त श्रीस्वामीजी श्रीकरपात्रीजी महाराजने बड़े अध्यवसायसे कृपापूर्वक यह पुस्तक लिख दी, जो आज पाठकों- के सामने है। इसमें पाश्चात्त्य दार्शनिकों एवं राजनीतिज्ञोंकी जीवनी, उनका समय मत-निरूपण, फिर उनकी आलोचना तथा साथ ही अपने ऋषियोंके मतका तुलनात्मक अध्ययन एवं उनकी श्रेष्ठता प्रतिपादित की है । विकासवादके अध्यायमें तो अद्भुत युक्ति तथा अगणित वैज्ञानिकोके मत द्वारा ही विकासका खण्डन एवं ईश्वरादिका मण्डन है।

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