पद्मावत (मलिक मोहम्मद जायसी - सटीक ऐतिहासिक महाकाव्य)
Padmavat with Hindi Commentary
मलिक मोहम्मद जायसी / पं. रामचन्द्र शुक्ल द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंते यह जिव डांढे परदाधा । आधा निकसरहाघट आधा ॥ जो अधिजरसों विलँबन लावा । करत बिलम्ब बहुत दुख पावा ॥ दो० एतना बोल कहत मुख, उठी बिरहकी आग । जो महेश नहिं अमी बुझावत, सकल जगत हुत लाग ॥ पार्वती मन उपजा चाऊँ । देखो कुँवरकेर सत भाऊ ॥ वहिं यह बीच किंप्रेमहि पूजा । तन मन एक कि मारगँ दूजा ॥ भईस्वरूप जानहु अप्सराँ । विहँसि कुँवरकर आँचर धरा ॥ सुनो कुँवर मोसों एक बाता । जस रंगमोर न दूसर राताँ ॥ औ विधि रूपदीन्ह है तोका । उठा सुशबदै जाय शिवलोका ॥ तबहों तोकहँ इन्द्रपठाई । की पद्मिन तुइँ अप्सरै पाई ॥ अब तजि जरन भरन तप योगू । मोसो मानि जन्म भर भोगू ॥ दो० हौं अप्सरै कैलासकी, जेहिसँ पूजनकोय । गो तजि सँवरजोवह मरिस, कौन लाभ तेहि होय ॥ भलहिं रंगतुहि अप्सर राताँ । मोहिं दुसर सो भावन बाता ॥ मोहिं वह सँवरि मुयेअसलहौं । नयनैं जो देखिसिपूँछसि कहा ॥ अबहिंताह जिवदिये न पावा । तेहिअस अप्सर ठाढ़ मनावा ॥ जो जिवदेहों वहकी आशा । नजनौं काह होय कैलाशा ॥ हौं कैलास काहि लै करों । सो कैलास लाग जेहिमरों ॥ वहकी बारै जीय निसवारों । शिर उतार न्योछावर डारों ॥ ताकर छाँहै कहै जो आई । दोउ जगतँ तेहिदेउँ बड़ाई ॥ दो० वह न मोर कछुआशा, हों वह आश करेउँ । जलाना १ महादेवजी २ अमृत ३ सब ४ पैदा होना ५ चाहना ६ राह ७ इन्द्रलोककी परी ८-१८-१६ हँसना ६ लाल १० ईश्वर ११ आवाज़ १२ इन्द्रतक भेजोंगी १३ छोड़ना १५-१८ बराबर १७ फ़ायदा १६-२१ लाल २० आंख २२ दरवाज़ा २३ न्योछावर २४ ख़बर २५ जहान २६ ॥