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पद्मावत (मलिक मोहम्मद जायसी - सटीक ऐतिहासिक महाकाव्य)

पद्मावत (मलिक मोहम्मद जायसी - सटीक ऐतिहासिक महाकाव्य)

Padmavat with Hindi Commentary

मलिक मोहम्मद जायसी / पं. रामचन्द्र शुक्ल द्वारा

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पृष्ठ 107

१०६ पद्मावत। बहीरक्त लिख दीन्हीं पाती। सुंवा जो लीन्ह चोंच भइरांती ॥ बांधी कंठ पड़ा जस क्रांथौ। बिरहिकैं जरा जायकहँ नाथौ ॥ दो० मसि नयनों लिखनी बरन, रोय रोय लिखा अकथ्थै। आखरैं दहै न कोई छुवै, दीन्ह परेवा हाथ ॥ औ मुख बचन सो कहौसि परेवा। पहिले मोर बहुतके सेवा ॥ पुनिरै सँवार कहोसि अस दूजी। जेउ बलैं दीन्ह देवतन पूँजी ॥ सो अबहीं तब से बल लागा। वल जिवरहा न तन सो जागा ॥ अलहि ईशहूँ तुमवल दीन्हा। जहाँ तुम तहाँ भाववल कीन्हा॥ जो तुम मयौ कीन्ह पग धारा। दृष्टि दिखाय बान विषमारा ॥ जो असजाकर आशा सुखी। दुख महँ एसन मारै दुखी ॥ नयनै भिखार न मानहिं सीखा। अगमनै दौरे लीन्ह पै भीखा ॥ दो० नयनहिं नयन जो बेधगये, नहिं निकसैं वे बानै। हिये जो आखरं तुम लिखी, ते शठ घटहिं परान ॥ ते बिष बान लिखूँ कहँ ताई। रक्तै जो चुआ भीज दुनियाई ॥ जान सुकोरी रक्तपसेऊँ। सुखी न जान दुखीकर भेऊँ ॥ गिनलपीरतिन काकर चिन्तौं। प्रीतमनिष्ठुर होहि अस निन्तौं॥ कासों कहूँ बिरह की भाखा। जासों कहों होय जरराखा ॥ बिरह आग तन जरमैं जरै। नयननीर सायर सब भरै ॥ पाती लिखी सँवर तुम नामा। रक्त लिखे आखर भय श्यामा॥ आखर जरहिं न कोई छुवा। तब दुख देख चला लै सुवा ॥ लाल १ गरदन २ निशान ३ आशिक ४ काजल आंखका ५ पलक ६ हाल ७ हर्फ ८-२० जलना ६ ज़ोर १० मौजूद ११ ईश्वर १२ मेहर- बानी १३ नज़र १४ आंख १५-१७ आगे १६ तीर १८ छाती १६ खून २१ कालासांप २२ लाल पसीना २३ भेद २४ अंदेश २५ बेदर्द २६ अर्थात् हमेशा से होते आये हैं २७ आँखका पानी तथा आँसू २८ तालाब २६ अर्थात् कालेहर्फ ३० ॥