भारतकोश
पद्मावत (मलिक मोहम्मद जायसी - सटीक ऐतिहासिक महाकाव्य)

पद्मावत (मलिक मोहम्मद जायसी - सटीक ऐतिहासिक महाकाव्य)

Padmavat with Hindi Commentary

मलिक मोहम्मद जायसी / पं. रामचन्द्र शुक्ल द्वारा

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११० पद्मावत । खेल मिसें¹ मैं चन्दन घाला । मगें जागेसि तो देवों जैमाला ॥ तबहुँ न जागा गा तू सोई । जागे भेट न सोये होई ॥ अब शँशि² होय चढ़े आकासा³ । जो जिव देय सो आवै पासा ॥ दो० तबलागि भेंकि न लैसका, रावनसिय इकसाथ । कौन भरोसे अब कहों, जीव पराये हाथ ॥ अब जो सूर⁴ गगन⁵ चढ़ आवै । राहु होय तौ शँशि कहँ पावै ॥ बहुतेहिं ऐसो जीवपर खेला । तू योगी किनमाहँ अकेला ॥ बिक्रम⁶ धसा प्रेमके बारा⁷ । सम्पावतें कहँ गयो पतारा ॥ सुदीपच्छैँ खण्डारवतैं लागी । गंगनें पूर होयगा बैरागी ॥ राजकुँवरैं कंचनपुरैं गयो । मिरगावतैं कहँ योगी भयो ॥ साधुकुँवरैं खण्डारवतैं योगू । मधु मालतिकहँ कीन्ह वियोगू ॥ प्रेमावतैं कैसुरसरें सांधा । ऊषैं लगि अनिरुद्धैं बरबांधा ॥ दो० हों रानी पद्मावत, सात स्वर्ग पर वास । हाथ चढ़ों सो तेहिंके, प्रथमै करै अपनास ॥ हौं पुनि अहौं ऐस तुम रँती । आधी भेट पिरीतम पाती ॥ तोहुँ जो प्रीति निबाहै आंटा । भँवरन देख केतमहँ कांटा ॥ होहु पतङ्ग आवगँहुँ दिया । लेहसमुद्रधसहोय मरि जिया ॥ रँतै रंगजिमि²⁹ दीपकवाती । नयनै लावहोयसीपसेवाति ॥ चात्रिकैं होहु पुकारपियासा । पियो न पानि स्वातिकी आसा ॥ सारंस हो बिछुरी जस जोरी । रैयनि³³ होयजलचकइ चकोरी ॥ बहाना १ शायद २ चाँद ३-७ भीख ४ सूर्य ५ आसमान ६ राजा बिक्रमाजीत ८ दरवाजा ६ नामरानी १०-१२-१६-१८-२१ राजाभोज ११ नाम जगह १३-१५ नाम राजा १४-१७-२२ भंवर १६ दुखी २० बेटी बाणासुर २३ पोता श्रीकृष्णचन्द्रजी २४ पहिले २५ लाल तथा खुश २६ निबाह करना २७ पकड़ना २८ सुर्ख २६ जिस तरह ३० आँख ३१ पपीहा ३२ रात ३३ ॥