पद्मावत (मलिक मोहम्मद जायसी - सटीक ऐतिहासिक महाकाव्य)
Padmavat with Hindi Commentary
मलिक मोहम्मद जायसी / पं. रामचन्द्र शुक्ल द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें१४ पद्मावत। दो० अस अँबराउँ सघनघन, बरणि न पारौं अन्त। फरी फूली छयों ऋतु, जानहु सदा वसन्त॥ फरे अम्ब अति सघन सुहाये। औ जसफरी औधिक शिरनाये॥ कटहर दार पेड़ सो पाके। बड़हर सो अनूप अतिताके॥ खिरनी पाकर खांड़ अस मीठी। जामुनपाक भँवर अस दीठी॥ तरवर फरे फरे खरहरे। फरे जानि इन्द्रासन परे॥ पुनि महुवा चुव अधिकै मिठासू। मँधु जसमीठ पुहुप जसवासू॥ और खजहजाँ उनकर नाउँ। देखा सब रानी अँवराउँ॥ लागि सबै जस अमृत शाखा। रहै लुभाय सोई जो चाखा॥ दो० लवँग सुपारी जायफल, सब फल फरे अपूर। आस पास घन ईमली, औ घन तार खजूर॥ बसहिं पंखे बोलहिं बहु भाखा। करहिं हुलासैं देखिके शाखा॥ भोरहोत बांसहिं चहि चुँहीं। बोलहिं पांडुकें एके तुहीं॥ सारो सुर्वा जो रहचहिं करहीं। करहिं पखेरूँ और करोरहीं॥ पिव पिवकर जो लाग पपीहा। तुही तुहीकर गड़रूँ केंहा॥ कुहू कुहू कर कोयल राखा। औ बिहँगराजे बोल बहुभाखा॥ दही दही करि महरि पुकारा। हारिल अपनी बोली हारा॥ कुहकहिं मोर सोहावन लागा। होय कराहर बोलहिं कागा॥ दो० जानवन्त पक्षी बनके, फिरि बैठे अँवराउँ²⁰। अपनी अपनी भाषना, लीन्ह दई²¹ करनाउँ॥ पैगें²² पैगें²³ पर कुँवा बावरी। साजी बैठकें औ पावरी²५॥ वारा १-८ बयान २ बहुत ३-४ शहद ५ फूल ६ नाम मेवा ७ गुंजान ८-१० चिड़ियाँ ११ खुशी करना १२ नाम चिड़ियाँ १३-१४ सारस १५ तोता १६ नाम चिड़ियाँ १७-१८ दहियड़ १६ बाग २० ईश्वर २१ क़दम २२-२३ बैठक २४ जीना २५॥