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पद्मावत (मलिक मोहम्मद जायसी - सटीक ऐतिहासिक महाकाव्य)

पद्मावत (मलिक मोहम्मद जायसी - सटीक ऐतिहासिक महाकाव्य)

Padmavat with Hindi Commentary

मलिक मोहम्मद जायसी / पं. रामचन्द्र शुक्ल द्वारा

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पद्मावत। ३ कीन्हेसि द्रव्य१ गर्व२ जेहि होई। कीन्हेसि लोभ३ अघाइ न कोई॥ कीन्हेसि जियन४ सदा सब चहा। कीन्हेसि मीच५ न कोई रहा॥ कीन्हेसि सुख औ कोटि अनंदू। कीन्हेसि दुख चिंताँ औ दंदू॥ कीन्हेसि कोइ भिखारी८ कोइ धनी९। कीन्हेसि संपति१०-११-१२ विपत्ति पुनि घनी१३॥ दो० कीन्हेसि कोइ निमरोसी१४, कीन्हेसि कोइ बरियारै। छारहि१५ ते सब कीन्हेसि, पुनि१६ कीन्हेसि सब छार॥ धनपति१७ वही जेहेकेँ संसारू१८। सबै देइ नितँ१९ घट न भँडारू२०॥ जानवंत जगत हस्ति औ चांटी। सब कहँ भुक्ति२६ राति दिन बाँटी॥ ताकर दृष्टि२७ जो सब उपराहीं। मित्रँ शत्रुँ कोइ बिसरै नाहीं॥ पंख पतंग न बिसरे कोई। परगटँ गुप्तँ जहांलग होई॥ भोग भुक्ति३२ बहु भांति३१ उपाई। सबै खवाइ आप नहिं खाई॥ ताकर वही जो खाना पीना। सब कहँ देइ भुक्ति औ चैना॥ सबै आश ताकर हरिखांसा। बहु न काहुकी आश निरासा॥ दो० युग युग देत घटा नहिं, उभय हाथ अस कीन्ह। औ जो दीन्ह जगत महँ, सो सब ताकर दीन्ह॥ आदि३७ एक वरणों सो राजा। औ दिन अंत राज जेहि छाजा॥ सदा सरवदाँ राज सो करै। और जेहि चहै राज तेहि दरै॥ छत्रहि४० अचँत निछत्रहि द्यावा। दूसर नाहिं जो सरवरि पावा॥ दौलत १ गरूर २ लालच ३ जीना ४ मौत ५ खुशी ६ फ़िक्र ७ ग़म ८ गरीब ९ अमीर १० दौलत ११ दुःख १२ बहुत १३ कमज़ोर १४ ज़ोरवाला १५ माटी १६ फिरि १७ दौलतमन्द १८ जिसका १९ हमेशा २० खज़ाना २१ जहांतक २२ दुनिया २३ हाथी २४ चींघटी २५ खुराक २६-३२ निगाह २७ दोस्त २८ दुश्मन २९ ज़ाहिर ३० छिपा ३१ बहुत तरह पैदा किया ३३ उम्मेद ३४ नाउम्मेद ३५ दोनों ३६ सबसे पहिले ३७ वयान करना ३८ अव्वल ना आखिर ३९ हमेशा ४० छत्रधारी ४१ विदून छत्र ४२ बराबरी ४३॥