पद्मावत (मलिक मोहम्मद जायसी - सटीक ऐतिहासिक महाकाव्य)
Padmavat with Hindi Commentary
मलिक मोहम्मद जायसी / पं. रामचन्द्र शुक्ल द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें६६ पद्मावत। अहो महा बिश्वासी देवा। कित मैं आय कीन्ह तू सेवा ॥ आपन नाव चढ़ै जो देइ । सो तो पार उतारै खेइ ॥ सुफलजानि पग ढेक्यों तोरा। सुआँ का सेमर तू भा मोरा ॥ पाहन चढ़ि जो चहिभा पारा । सो ऐसे बूडै मँझधारा ॥ पाहनै सेवो कहां पसीजा । जनमत पलवै जो जलभीजा ॥ बावर सोई सुपाहन पूजा । सकत की मार लई शिरदूजा ॥ काहे न पूजै सोई निराशाँ । मुँये जीत मन जाकर आशा ॥ दो० सिंह तरैंदा जेहिं गही, पार भये ते साथ। तेपै बूडै बारहिं, भेंड पूंछ जेहि हाथ ॥ देव कहा सुनि बौरे राजा। देवहि अगमने मारा गाजौ ॥ जो पहिले अपने शिर परी । सो का काहुक धरधरै करी ॥ पद्मावत राजा की बौरी। आय सखिन सो मंडफ उघारी ॥ जैस चांद गोहने सब तारा। पख्यो भुलाय देख उजियारा ॥ चमके दर्शन बीजे की नाई। नयने चक्र चमकात भवाँई ॥ हों तेहि दीप पतङ्ग होय परा । जिवजिमि काढ स्वर्ग लै अचरा ॥ फेर न जाना वहँ का भई । वहँ कैलास कि कहें अपैंसई ॥ दो० अबहूँ मरों निसौसी, हिये न आवै सांस । रुगिया की को चालै, बैदहि जहां उपास ॥ अनहों दोष देउँ का काहू । सुनिके कयों मर्यो नहिं ताहू ॥ हितू पियारा मीत बिछोई । साथ न लाग आपका सोई ॥ पैर १ तोता २ पत्थर ३-४ खिदमत ५ मुश्किल समय का बोझ कौन दूसरा उठाता है ६ नाउम्मेद ७ मरना ८ शेर ६ पकड़ना १० पहिले ११ विजुली १२-१७ दस्तगीरी १३ लड़की १४ साथ १५ दांत १६ आंख १८ घूमना १६ जिसतरह २० आसमान २१ छिपना २२ वेदम २३ दिल २४ बदन २५ मेहरबानी २६ दोस्त २७-२८ जुदाई २६ ॥