भारतकोश
पृथ्वीराज रासो (सटीक हिन्दी व्याख्या)

पृथ्वीराज रासो (सटीक हिन्दी व्याख्या)

Prithviraj Raso by Chand Bardai with Hindi Commentary

महाकवि चन्दबरदाई / कविराज मोहनसिंह द्वारा

DevanagariHindipublished470 पृष्ठ

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पृष्ठ 7

। ५ सूचीपत्र । पृष्ठ । ४६ ढूँढा दानव का प्रश्च.. होकर रहना ॥ ... ... १०६ ५० अजमेर की नट भट दवा प्रेत के पास जाना ॥ ... १०६ ५१ आना का अपने मन में विच.. ) दशम सम ... ... १०७ ५२ आना का दानव की कंदरा में मारने पर दानव का गाजना ॥ ... १०८ ५३ इस पर दानव का आना से उठ १८१ से २५४ ता नाम पूछना ॥ ... ... " ५४ ढूँढा दानव का आना के सिर प. देना ॥ ... ... " ५५ आना का मन में चिंता करना कि क.. ..क निगलेगा तो मैं उसका पेट चीर कर निकलूंगा ॥ १०६ ५६ आना का उत्तर देना कि जिह से बीसलदेवजी का मन सैन होगया ॥ ... ... " ५७ दानव का आना से पूछना कि तू क्यों राज भ्रस्त है ॥ ... ... ११० ५८ आना का बीसलदेवजी दानव को उत्तर दे कहना ॥ ... ... " ५६ ढूँढा दानव का प्रसन्न होकर आना को अजमेर का राज देना ॥ ... ... १११ ६० ढूँढा का आना को राज देकर गंगा की ओर उड़कर जाना ॥ ... ... " ६१ ढूँढा का नेमऋषियों के उपदेश से गंगा की ओर जाते हुए दिल्ली पहुँचना ॥ ... ... " ६२ ढूँढा का शारिफ ऋषि से मिलना, और अपनी पूर्व कथा कहना और तीन सौ अस्सी वर्ष महा तप करके ऋषि से उपदेश ग्रहण करना ॥ } ११२ ६३ अनंगपाल राजा का दिल्ली बसाना ॥ ... ... ... ११४ ४ अनंगपाल की सुता का निगमबोध कालिंद्री तट पर गौरी पूजने जाना ॥ ... ... " ५ अनंगपाल की सुता का ढूँढा को पूजना और उस का कारण पूछना ॥ ... ... " ६ अनंगपाल की सुता का ढूँढा वर के चाहने को पूजने का कहना ॥ ... ... ११५ ७ ढूँढा का राज स्त्रियों की सेवा से संतुष्ट होना ॥ ... ... " ८ ढूँढा का वर देकर काशी को उड़ जाना ॥ ... ... " ६ ढूँढा का फिर जन्म लेना और उसका वृत्तान्त चंद का वर्णन करना ॥ ... ... " ७० ढूँढा का वर देना और काशी में यज्ञ कर तन त्यागना ॥ ... ... " १ ढूँढा के दानव शरीर का मान और स्वरूप वर्णन ॥ ... ... ... ११६ २ ढूँढा का दिल्ली में पाषाणरूप हो जाना और स्त्रियों का उसे पूजना ॥ ... ... " ३ ढूँढा का अनंगपालकी सुता को वीर पुत्र होने का वर देना ॥ ... ... " ४ ढूँढा का वर देकर काशी जाना, यहां दायत योनि से मुक्त हो अवतार लेना सोमेश्वर की परिग्रह के प्रबंध के लिये क्षत्रियों का उत्पत्न होना, जिन में से बीस अजमेर में और अन्य अन्यत्र हुए सोमेश के वीर पुत्र पृथ्वीराज हुए ॥ } ११७ ५ पृथ्वीराज जी के परिग्रह के सामंतों के नाम और जन्म स्थानादि का वर्णन ॥ ... १२० ६ आना राजा का उजड़ी हुई अजमेर को फिर बसाकर राज करना ॥ ... ... १२१ ७ जैसिंह जी का गद्दी पर विराज राज करना ॥ ... ... ... " ८ आनन्दमेवजी का राज करना ॥ ... ... ... ... १२२ ६ सोमेश्वरजी का सिंहासन पर विराज राज करना ॥ ... ... ... " ० सोमेश्वर जी की शूरता का संक्षेप वर्णन ॥ ... ... ... " १ दिल्ली के राजा अनंगपाल जी पर कमधज्ज का चढ़ना ॥ ... ... १२३ २ कमधज्ज की चढाई सुन अनंग का कालिन्दी उत्तर मुकाम करना ॥ ... ... " ३ कमधज्ज की चढाई सुन सोमेश का अनंग की सहायता को दिल्ली जाना और वहां पहुंच अनंग पालजी से एकान्त में मंत्रणा करना ॥ } १२४ १८४ अनंग की बात सुन सोमेश का रोस में आय लड़ने को तयार होना ॥ ... १२५ १८५ दोनों राजाओं का डेरों पर जाना और पिछली रात को युद्धारंभ होना ॥ ... ... १२६ १८६ सोमेश की सहायता से अनंग की विजयपालजी के साथ लड़ाई ॥ ... ... " १८७ सोमेश्वरजी का दिल्ली में बड़ा साहस करना ... ... ... १३१ १८८ कमधुज्ज का पराजित हो घर जाना और सोमेश का अजमेर को चलना ॥ ... ... १३२ १८६ अनंगपालजी का सोमेश्वर जी को कन्यादान करना ॥ ... ... " १६० सोमेश्वरजी का अजमेर आना और वहां बड़ा उत्सव होना ... ... "