राजपूताने का इतिहास (मेवाड़ राज्य का इतिहास व वीर गाथाएँ)
History of Rajputana & Mewar by Gaurishankar Ojha
महामहोपाध्याय पं. गौरीशंकर हीराचन्द ओझा द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें( ६ ) विषय पृष्ठाङ्क बादशाह का महारावत को शाही दरबार में बुलाना १८५ महाराजा अजीतसिंह और सवाई जयसिंह का देवलिया जाना १८६ किशनगढ़ के राजा राजसिंह का देवलिया जाकर रहना १८७ महारावत का परलोकवास ... ... १८८ महारावत की राणियां और संतति ... ... १८६ महारावत के समय के लोकोपयोगी कार्य ... १९० महारावत का विद्यानुराग ... ... १९१ महारावत के समय के शिलालेख और दानपत्र ... १९१ महारावत का व्यक्तित्व ... ... १९३ ——— पांचवां अध्याय महारावत पृथ्वीसिंह से सामन्तसिंह तक पृथ्वीसिंह ... ... ... १९७ राज्यप्राप्ति ... ... ... १९७ महारावत की पुत्री का जोधपुर के महाराजा के साथ विवाह होना ... ... १९७ महारावत के नाम वसाड़ का पुनः फ़रमान और उसके मंसब में वृद्धि होना ... १९८ जहांदारशाह के पास से वसाड़ परगने का फ़रमान होना १९६ महारावत के नाम बादशाह फ़र्रुख़सियर का फ़रमान २०० महारावत का शाही इलाके में लूट-मार करना ... २०१ महारावत का अपने कुंवर पहाड़सिंह को उदयपुर भेजना २०२ आंबेर और बूंदी के नरेशों का बादशाह से महारावत की शिकायत करना ... ... २०३ शिकायतों की जांच के लिए कुतुबुलमुल्क का भेजा जाना २०४