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झाँसी की रानी लक्ष्मीबाई (१८५७ स्वातन्त्र्य समर की अमर वीरांगना शौर्य इतिहास)

झाँसी की रानी लक्ष्मीबाई (१८५७ स्वातन्त्र्य समर की अमर वीरांगना शौर्य इतिहास)

Rani Lakshmibai of Jhansi Historical Biography

वृन्दावनलाल वर्मा / ऐतिहासिक शोध द्वारा

DevanagariHindipublished526 पृष्ठ

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लक्ष्मीबाई १२५ [ २६ ] जिस इमारत में आजकल डिस्ट्रिक्ट बोर्ड का दफ्तर है, वह उस समय डाक बङ्गले के काम आता था। पास ही झासी प्रवासी अङ्गरेजो का क्लब घर था। एलिस और मार्टिन राजा के पास से आकर सीधे क्लब गये। वहा और कई अङ्गरेज आमोद-प्रमोद मे मग्न थे। यहा इन दोनो का जी हल्का हुआ। 'उन अङ्गरेजो ने महल का हाल पूछा।' 'राजा बीमार है। बच नही सकता।' 'इलाज वही दकियानूसी होगा ?' 'एक मूर्ख वैद्य कुछ पीस-पासकर मधु के साथ खिला रहा है।' 'कैप्टन एलन' का इलाज करवाओ।' 'खुशी से, परन्तु ये लोग ऐसे कट्टर-धर्मी हैं कि शायद राजा एलन के हाथ की छुई हुई दवा न खायगा।' 'शायद अच्छा हो जाय। न हुआ तो क्या होगा ?' 'राजा ने एक लडके को गोद लिया है।' 'कब ?' 'आज हम लोगो के सामने।' 'गोद ! यानी झासी में वही मनमानी और कानून हीन व्यवस्था जारी रहने दी जावेगी ?' एलिस ने इस प्रसङ्ग को आगे नही बढने दिया। तब व र्तालाप की धारा दूसरी ओर मुड गई और बातचीत में सभी शरीक हो गये। 'सुनते हैं रानी बहुत सुन्दर है। अच्छी घुडसवार है। यदि नाचना सीखे तो उसका नृत्य अजीब होगा।' एक अङ्गरेज ने कहा। 'चुप मूर्ख', एलिस बोला, 'अभी उसी के राज्य में बैठे हो। हिन्दुस्थानी लोग अपने राजा-रानी के बारे ऐसी बात सुनना बिलकुल पसन्द नही करते।'