झाँसी की रानी लक्ष्मीबाई (१८५७ स्वातन्त्र्य समर की अमर वीरांगना शौर्य इतिहास)
Rani Lakshmibai of Jhansi Historical Biography
वृन्दावनलाल वर्मा / ऐतिहासिक शोध द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें'और तुम्हारे रिसाले में जो कुछ ब्राह्मण माथा रंग रंग कर परेड में आते थे उनका तो अनुशासन कर दिया ?' 'हा। पहले उन्होंने कहा हमारा टीका है । धर्म की बात । फिरें हमने पुछवा दिया । डैम्मइट ऑल । भई कितनी जहालत भरा मुल्क है !' 'जरूर । परेड से छुट्टी पाकर बारक में न सिर्फ माथे पर बल्कि माथे से लेकर पैर की उँगली तक टीको से देह को रगलो हमको फिकर नही । इस धर्म से हमको महान कष्ट होता है ।' 'अभी यह कौम बिलकुल नादान और जाहिल है। अङ्गरेजी पढने से अकल कुछ सुधरेगी । बाईबिल का पढाना मदरसो में इसीलिये जरूरी रक्खा गया है । जब अङ्गरेजी का प्रचार हो जावेगा और बाईबिल की संस्कृति इनके खून में बैठ जायगी तब धरातल कुछ ऊँचा होगा ।' 'हाँ, और कदाचित् तब इस देश के लोग हमारे शेक्सपियर, वाल्टर स्काट, बायरंन की पूजा कर उठे । यहा के लोग पूजा, नमाज बहुत जल्दी कर उठते हैं।' 'गंगाधरराव की नाटकशाला में जो नाटक खेले जाते थे वे कौनसी बला होते हैं ?' 'महज कूडा कर्कट तो नही है । शकुन्तला नाटक तो मैने भी पढा है । मोनियर विलियम्स का अनुवाद । खूबसूरत चीज है। यद्यपि टैम्पैस्ट की मिराण्डा को शकुन्तला नही पहुचती, फिर भी एक चीज है··' 'ऐसी कितनी पुस्तके हिन्दू मुसलमानो के पास होगी ?' 'हिन्दुओ की गाठ में शकुन्तला, कुछ वेद और कुछ ऐसा ही साहित्य है । मुसलमानो के पास कुरान, गुलिस्ताँ, वोस्ताँ और उमरखंयाम की रुबाइया । बस खतम । बाकी सब कूडा, महज रद्दी ।' 'तुम तो लार्ड मैकाले की भाषा में बोल रहे हो पट्टू ।' 'मैकाले क्या गलत कहता है ? उसने तो हिन्दू मुसलमानो को बहुत बडा गौरव दिया जो यह कह दिया कि इनकी सारी अच्छी पुस्तकें एक छोटी सी अलमारी मे बन्द की जा सकती हैं।'