भारतकोश
रसार्णव (शैव रस-तन्त्र - प्राचीन भारतीय खनिज रसायन, धातुवाद एवं रस-चिकित्सा सटीक)

रसार्णव (शैव रस-तन्त्र - प्राचीन भारतीय खनिज रसायन, धातुवाद एवं रस-चिकित्सा सटीक)

Rasarnava: Tantric Chemistry and Alchemy with Commentary

शिव-पार्वती संवाद (सम्पादक: प्रफुल्लचन्द्र राय एवं हरीशचन्द्र कविराज) द्वारा

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वर्द्धन्याभ्युक्ष्य साधकम्¹¹ ॥ ८० ॥ शतमष्टोत्तरं चैवमर्घ्यपात्रोदकेन¹² तु ।

Footnotes:
(1) Both K and M read यक्षरक्षेभ्यः, which is grammatically in-
correct, the term being रक्षस् and not रक्ष. (2) M reads संयुक्तां,
which is incorrect. (3) सर्व्वकर्णाकरं, a variant in M, which is
meaningless. (4) K reads विघ्नोपद्रवनाशणम्, which is palpably an
error of the scribe. M adds here after the 76th śloka अघोरेभ्योऽथ घोर
इति मन्त्रं नमोऽन्तकम्, which we have rejected as it is redundant.
(5) K reads विद्योपविद्या विद्या तु, which has no clear sense. (6) योनि-
वक्त्रं, a variant in K. (7) पयःपूर्णफलाश्रितम्, a reading in M. (8)
K reads तथाष्टशत. (9) M reads कीर्णं. (10) K reads बलिपात्रञ्च.