रसतरङ्गिणी (सदानन्द शर्मा - पारद, धातु, उपधातु एवं भस्म रसायन शास्त्र सटीक)
Rasatarangini of Sadananda Sharma with Prasadani Commentary
सदानन्द शर्मा (टीकाकार: पं. हरिदत्त शास्त्री) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें७२४ रसतरङ्गिणी भङ्गा सुश्लक्ष्णसंपिष्टा शिलायां विमलाम्भसा । कोष्णोपनाहयोगेन कथिताशोर्व्यथाहरा ॥४१६॥ धूम्रपानविधानेन भङ्गा युक्त्याथवाशिता ॥ साक्षेपं तमकश्वासं कासं संक्रामकं हरेत् ॥४१७॥ आमयिकप्रयोगे—धूम्रपानविधानेन प्रयुक्ता अथवा अशिता भङ्गिता साक्षेपं तमकश्वासं तथा सङ्क्रामकं कासं “Whooping Cough” इति ख्यातं हरति ॥ भा.टी.—गीली या सूखी भांग की पत्तियों को खरल में बकरी के दूध के साथ पीस कर पैरों के तलवों पर लेप करने से शीघ्र ही नींद आने लगती है। बवासीर के मस्सों में अधिक पीड़ा होने पर भांग की पत्तियों को सिल पर जल के साथ पीसकर इसकी गुनगुनी पुलटिस गुदा पर बाँधने से पीड़ा शान्त हो जाती है। आक्षेप युक्त तमकश्वास ( दमा ) में भांग का धूम्रपान करने से दमा का दौरा कम हो जाता है। संक्रामक कास ( Whooping Cough ) में थोड़ी सी भांग खिलाने अथवा भांग के योग देने से कास का आक्षेपयुक्त कष्ट कम हो जाता है ॥४१५-४१७॥ मदनोदयमोदकः जातीपत्रीफले मांसी लवङ्गं चन्द्रकुङ्कुमम् । एला दारुसिता व्योषं वङ्गं जीरकमभ्रकम् ॥४१८॥ लोहं च रससिन्दूरं पृथक् तोलकसंमितम् । शतावरी गोक्षुरको द्राक्षा कर्कटशृङ्गिका ॥४१९॥ बलात्मगुप्ता कुष्ठं च वृद्धदारकबीजकम् । चूर्णीकृतं सर्वमेतत् पृथक कर्षद्वयोन्मितम् ॥४२०॥ भङ्गा विशोधिता चैव पूर्वचूर्णांर्द्धसंमिता । सितां सर्वद्विगुणितां दत्त्वा रसविशारदः ॥४२१॥ आरभ्य माषत्रितयाद्रसमाषकसंमितान् । निर्मापयेन्मोदकांस्तु खलु मोदकपाकवित् ॥४२२॥ नामतोऽयं समाख्यातो मदनोदयमोदकः । मदनोद्दीपनकरो विशेषात्परिकीर्तितः ॥४२३॥ शृतं परं घनीभूतं सितैलासंयुतं पयः । अनुपाने प्रयोक्तव्यं तदतीव हि बृंहणम् ॥४२४॥