ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)
Rigveda Samhita with Hindi Translation
डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा
स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)
पृष्ठ 1577, कुल 1855 में से
संदर्भ में पढ़ेंहमारे सोमरस तैयार करने वाले, उत्तम वस्त्रधारक एवं नियमपूर्वक देवादि को सोमपान कराने वाले प्राचीन पितर यम के साथ एवं यम उनके साथ हवि आदि का उपभोग करना चाहते हैं. यम उन पितरों के साथ अपनी इच्छाओं के अनुसार हव्य भक्षण करें. (८) ये तातृषुर्देवत्रा चेहमाना होत्राविदः स्तोमतष्टासो अर्कैः. आग्ने याहि सुविद्वेत्रेभिर्वाङ् सत्यैः काव्यैः पितृभिर्घर्मसद्भिः.. (९) हे अग्नि! यज्ञ करने के ज्ञाता, स्तोत्रों और मंत्रों के बनाने वाले एवं क्रम से देवत्व पाने वाले जो पितर प्यासे हैं, उन्हें हमारे सामने लेकर आओ. वे पितर विशेष परिचित, विवादरहित, यज्ञ में बैठने वाले एवं हव्य ग्रहण करने वाले हैं. (९) ये सत्यासो हविरदो हविष्पा इन्द्रेण देवैः सरथं दधानाः. आग्ने याहि सहस्रं देववन्दैः परैः पूर्वैः पितृभिर्घर्मसद्भिः.. (१०) हे अग्नि! जो पितर सच्चे, हव्य भक्षण करने वाले, सोम पीने वाले, इंद्रादि देवों के साथ एक रथ पर बैठने वाले, देवाराधन कर्त्ता, पहले वाले, उनके बाद वाले एवं यज्ञ में बैठने वाले हैं. उन पितरों के साथ आओ. (१०) अग्निष्वात्ताः पितर एह गच्छत सदःसदः सदत सुप्रणीतयः. अत्ता हवींषि प्रयतानि बर्हिष्यथा रयिं सर्ववीरं दधातन.. (११) हे अग्निष्वात्त नामक पितरो! यहां आओ और स्वागत स्वीकार करके अपने-अपने आसनों पर बैठो एवं कुशों पर फैले हुए हव्यों को खाओ. इसके बाद हमें पुत्र-पौत्रों से युक्त धन दो. (११) त्वमग्न ईळितो जातवेदोऽवाढ्ढव्यानि सुरभीणि कृत्वी. प्रादाः पितृभ्यः स्वधया ते अक्षन्नद्धि त्वं देव प्रयता हवींषि.. (१२) हे सबको जानने वाले अग्नि! हमने तुम्हारी स्तुति की है. तुमने हमारा हव्य सुगंधित बनाकर पितरों को दिया है. पितर ‘स्वधा’ शब्द के साथ दिया हुआ हवि भक्षण करें. हे अग्नि देव! तुम हमारे प्रयत्न द्वारा संपादित हव्यों का भक्षण करो. (१२) ये चेह पितरो ये च नेह याँश्च विद्म याँ उ च न प्रविद्म. त्वं वेत्थ यति ते जातवेदः स्वधाभिर्यज्ञं सुकृतं जुषस्व.. (१३) हे जातवेद अग्नि! तुम उन सब पितरों को जानते हो, जो यहां आए हैं, जो यहां नहीं आए हैं, जिन्हें हम जानते हैं और जिन्हें हम नहीं जानते हैं. तुम स्वधा शब्द के साथ किए गए हमारे यज्ञ को स्वीकार करो. (१३) ये अग्निदग्धा ये अनग्निदग्धा मध्ये दिवः स्वधया मादयन्ते. ebook converter DEMO Watermarks*