भारतकोश
रोगों की पहचान

रोगों की पहचान

Rogon Ki Pehchaan

सतगुरु मधु परमहंस जी द्वारा

स्रोत: Sahib Bandgi Sant Ashram Ranjri Edition · Sahib Bandgi Sant Ashram Ranjri, Jammu (उद्गम)

DevanagariHindipublished128 पृष्ठ

पृष्ठ 12, कुल 128 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 12

अस्वस्थ शरीर की पहचान

मोटापा अस्वस्थ शरीर की सबसे बड़ी और आसान पहचान है।

अस्वस्थ शरीर की आकृति सुंदर न होकर भद्दी होती है, उसके अंग भी सुडौल न होकर बेडौल होते हैं।

अस्वस्थ शरीर में पैर धड़ के मुकाबले छोटे और मोटा आकार लिए हुए होते हैं।

अस्वस्थ शरीर में सिर को गर्दन से अलग करने वाली रेखा साफ दिखाई नहीं देती।

अस्वस्थ शरीर में मस्तक ऊँचा न होकर झुका हुआ होता है।

अस्वस्थ शरीर में सिर चर्बी से भरा होता है।

अस्वस्थ शरीर में सिर मस्तक के ऊपर गंज लिए हुए होता है।

अस्वस्थ शरीर में आँखें भी पूरी खुली हुई नहीं होतीं, उनमें तनाव भी बराबर दिखाई देता है।

अस्वस्थ शरीर में मुँह खुला-सा होता है।

कंधों का ढीला होना भी अस्वस्थ शरीर की निशानी है।

अस्वस्थ शरीर की नाक भी सुंदर न होकर मोटी-सी होती है।

बाल वाले स्थानों पर बालों का न होना भी अस्वस्थ शरीर की निशानी है।

अस्वस्थ शरीर की त्वचा रूखी होती है।

अस्वस्थ शरीर की त्वचा से बदबू आती है।

शरीर का रंग बहुत पीला होना या बहुत लाल होना भी अस्वस्थ शरीर की निशानी है।

गर्दन इतनी छोटी हो कि दिखाई न पड़े या इतनी लंबी हो कि अजीब-सी लगे तो यह भी अस्वस्थ शरीर की निशानी है।

12