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रोगों की पहचान

रोगों की पहचान

Rogon Ki Pehchaan

सतगुरु मधु परमहंस जी द्वारा

स्रोत: Sahib Bandgi Sant Ashram Ranjri Edition · Sahib Bandgi Sant Ashram Ranjri, Jammu (उद्गम)

DevanagariHindipublished128 पृष्ठ

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रोगों की पहचान

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पानी के दो लोटे शरीर पर डालकर रगड़ें। इसके बाद ठण्डे जल का एक लोटा डालें और रगड़ें। ऐसा बार-बार करें। कोई 5 बार कर लें। अंत में जब ठण्डे पानी का लोटा डालें तो स्नान बंद कर दें और तौलिये से शरीर को पौछ लें। सिर पर बाँधा तौलिया भी उतार दें।

गर्म-ठंडा पूर्ण स्नान निम्नलिखित रोगों में लाभदायक है—

कमर दर्द, पीठ में दर्द, कंधों में दर्द, टाँगों में दर्द और अन्य दर्दों में लाभकारी है।

गर्म सेंक

एक पतली में गर्म पानी करके रख लें। अब जिस अंग में रोग हो, उसपर नारियल का पानी लगाकर एक सूखा कपड़ा रख दें। फिर एक तौलिये को उस गर्म पानी में डालकर बाहर निकालें और निचोड़ लें। अब उस अंग पर रखें और ऊपर से कोई मोटा या ऊनी कपड़ा डाल दें। जब लगे कि कपड़े की गर्मी कम हो गयी है तो पुनः गर्म पानी में डालकर वैसा ही करें। बाद में ठंडे गीले तौलिये से उस अंग को मलें और कोई ऊनी कपड़ा लपेट दें।

नोट

□ यह सेंक 20-30 मिनट दें।

यह सेंक निम्नलिखित रोगों में लाभकारी है—

मोच, जिगर में पीड़ा, किसी भी अंग में दर्द।

धूप स्नान

सारे कपड़े खोलकर किसी एकांत स्थान में, जहाँ धूप पड़ती हो, बैठकर धूप-स्नान लिया जा सकता है। इसका समय सूर्य निकलने के बाद एक-डेढ़ घण्टे के अंदर ही होता है। कम-से-कम 15 मिनट तक यह स्नान लें।