श्रीमद्भगवद्गीता साधक-संजीवनी (परिशिष्टसहित)

श्रीमद्भगवद्गीता साधक-संजीवनी (परिशिष्टसहित)
Shrimad Bhagavad Gita Sadhak Sanjeevani
स्वामी रामसुखदास द्वारा
स्रोत: संवर्धित नब्बेवाँ संस्करण (90th Edition), गीता प्रेस गोरखपुर · गीताप्रेस, गोरखपुर · 2008 (उद्गम)
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( ८ )
| श्लोक-संख्या | विषय | पृष्ठ-संख्या |
|---|---|---|
| सातवें अध्यायका सार ..... | ५७६-५७७ | |
| आठवाँ अध्याय | ||
| १-७ | अर्जुनके सात प्रश्न और भगवान्के द्वारा उनका उत्तर देते हुए सब समयमें अपना स्मरण करनेकी आज्ञा देना ..... | ५७९-५९३ |
| (विशेष बात ५८३; मार्मिक बात ५८७; विशेष बात ५८९; स्मरण-सम्बन्धी विशेष बात ५९२) | ||
| ८-१६ | सगुण-निराकार, निर्गुण-निराकार और सगुण-साकारकी उपासनाका फलसहित वर्णन ..... | ५९४-६०५ |
| (विशेष बात ६०२, ६०४, ६०४) | ||
| १७-२२ | ब्रह्मलोकतककी अवधिका और भगवान्की महत्ता तथा भक्तिका वर्णन ..... | ६०५-६१३ |
| (विशेष बात ६१२) | ||
| २३-२८ | शुक्ल और कृष्ण-गतिका वर्णन और उसको जाननेवाले योगीकी महिमा ..... | ६१३-६२१ |
| (विशेष बात ६१६) | ||
| आठवें अध्यायके पद, अक्षर और उवाच ... | ६२१ | |
| आठवें अध्यायमें प्रयुक्त छन्द ..... | ६२१ | |
| नवाँ अध्याय | ||
| १-६ | प्रभावसहित विज्ञानका वर्णन ..... | ६२३-६३६ |
| (ज्ञान और विज्ञान-सम्बन्धी विशेष बात ६२४; विशेष बात ६२८; मार्मिक बात ६३३; विशेष बात ६३५) | ||
| ७-१० | महासर्ग और महाप्रलयका वर्णन ... | ६३६-६४२ |
| ११-१५ | भगवान्का तिरस्कार करनेवाले एवं आसुरी, राक्षसी और मोहिनी प्रकृतिका आश्रय लेनेवालोंका कथन तथा दैवी प्रकृतिका आश्रय लेनेवाले भक्तोंके भजनका वर्णन ..... | ६४२-६४९ |
| १६-१९ | कार्य-कारणरूपसे भगवत्स्वरूप विभूतियोंका वर्णन ..... | ६४९-६५४ |
| २०-२५ | सकाम और निष्काम उपासनाका फलसहित वर्णन ..... | ६५४-६६३ |
| (विशेष बात ६५९, ६६२) | ||
| २६-३४ | पदार्थों और क्रियाओंको भगवदर्पण करनेका फल बताकर भक्तिके अधिकारियोंका और भक्तिका वर्णन ..... | ६६३-६९० |
| (विशेष बात ६६४, ६६६, ६६८; |
| श्लोक-संख्या | विषय | पृष्ठ-संख्या |
|---|---|---|
| मार्मिक बात ६७७; विशेष बात ६८१; मार्मिक बात ६८२, ६८४; विशेष बात ६८८; सातवें और नवें अध्यायके विषयकी एकता ६८८) | ||
| नवें अध्यायके पद, अक्षर और उवाच ..... | ६९० | |
| नवें अध्यायमें प्रयुक्त छन्द ..... | ६९० | |
| नवें अध्यायका सार ..... | ६९१-६९२ | |
| दसवाँ अध्याय | ||
| १-७ | भगवान्की विभूति और योगका कथन तथा उनको जाननेकी महिमा ६९३-७०४ (विशेष बात ६९९, ७०२) | |
| ८-११ | फलसहित भगवद्भक्ति और भगवत्कृपाका प्रभाव ..... | ७०४-७११ |
| (विशेष बात ७०५, ७१०) | ||
| १२-१८ | अर्जुनके द्वारा भगवान्की स्तुति और योग तथा विभूतियोंको कहनेके लिये प्रार्थना ..... | ७१२-७१८ |
| १९-४२ | भगवान्के द्वारा अपनी विभूतियोंका और योगका वर्णन ..... | ७१८-७४२ |
| (विशेष बात ७३५, ७३९) | ||
| दसवें अध्यायके पद, अक्षर और उवाच ..... | ७४२ | |
| दसवें अध्यायमें प्रयुक्त छन्द ..... | ७४२ | |
| ग्यारहवाँ अध्याय | ||
| १-८ | विराट्रूप दिखानेके लिये अर्जुनकी प्रार्थना और भगवान्के द्वारा अर्जुनको दिव्यचक्षु प्रदान करना ..... | ७४३-७५२ |
| (विशेष बात ७५०, ७५१) | ||
| ९-१४ | संजयद्वारा धृतराष्ट्रके प्रति विराट्रूपका वर्णन ..... | ७५२-७५६ |
| १५-३१ | अर्जुनके द्वारा विराट्रूपको देखना और उसकी स्तुति करना ..... | ७५६-७७१ |
| (विशेष बात ७५६; मार्मिक बात ७६२) | ||
| ३२-३५ | भगवान्के द्वारा अपने अत्युग्र विराट्रूपका परिचय और युद्धकी आज्ञा ..... | ७७१-७७६ |
| (विशेष बात ७७५) | ||
| ३६-४६ | अर्जुनके द्वारा विराट्रूप भगवान्की स्तुति-प्रार्थना ..... | ७७६-७८८ |
| (ग्यारहवें अध्यायमें ग्यारह रसोंका वर्णन ७८५, विशेष बात ७८६) | ||
| ४७-५० | भगवान्के द्वारा विराट्रूपके दर्शनकी |