सामवेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)
Samaveda Samhita with Hindi Translation
डा. रेखा व्यास द्वारा
स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)
पृष्ठ 147, कुल 310 में से
संदर्भ में पढ़ेंहैं. (७) वृष्णस्ते वृष्ण्य २४ शवो वृषा वनं वृषा सुतः. स त्वं वृषन्वृषेदसि.. (८) हे सोम! आप शक्तिशाली, बहुत सामर्थ्यवान हैं. आप की सेवा भी शक्तिवर्द्धक है. आप का रस एवं आप स्वयं भी बलवर्द्धक हैं. (८) अश्वो न क्रदो वृषा सं गा इन्दो समर्वतः. वि नो राये दुरो वृधि.. (९) हे सोम! आप शक्तिमान हैं. आप घोड़े की तरह आवाज करते हैं. आप हमें गोधन और अश्वधन देते हैं. आप हमारे लिए धन के द्वार खोलते हैं. (९) वृषा ह्यसि भानुना द्युमन्तं त्वा हवामहे. पवमान स्वर्द्दशम्.. (१०) हे सोम! आप अवश्य ही शक्तिवर्द्धक हैं. आप पवित्र व प्रकाशमान हैं. हम यज्ञ में आप को बुलाते हैं. (१०) यदद्भिः परिषिच्यसे मर्मृज्यमान आयुभिः. द्रोणे सधस्थमश्रुषे.. (११) हे सोम! यजमान आप को शुद्ध बनाते हैं. जल से आप को सींचा जाता है. जल मिलाने के बाद आप को द्रोणकलश में स्थापित किया जाता है. (११) आ पवस्व सुवीर्यं मन्दमानः स्वायुध. इहो ष्विन्दवा गहि.. (१२) हे सोम! हमारे यज्ञ में पधार कर आप उस की शोभा बढ़ाइए. आप आनंददायी हैं. आप हमें वीर बनाइए. हमें श्रेष्ठ वीर्य (संतान) प्रदान कीजिए. (१२) पवमानस्य ते वयं पवित्रमभ्युन्दतः. सखित्वमा वृणीमहे.. (१३) हे सोम! छलनी में छन कर पवित्र होने वाले आप से हम मित्रता की इच्छा रखते हैं. (१३) ये ते पवित्रमूर्म्मयो ऽ भिक्षरन्ति धारया. तेभिर्नः सोम मृडय.. (१४) हे सोम! अपनी लहरों जैसी झरती हुई पवित्र धाराओं से हमें सुख प्रदान कीजिए. (१४) स नः पुनान आ भर रयिं वीरवतीमिषम्. ईशानः सोम विश्वतः.. (१५) हे सोम! आप संसार के ईश्वर व पवित्र हैं. आप हमें धनवान, अन्नवान और वीर पुत्रवान बनाने की कृपा कीजिए. (१५) दूसरा खंड अग्निं दूतं वृणीमहे होतारं विश्ववेदसम्. अस्य यज्ञस्य सुक्रतुम्.. (१) अग्नि सभी धन पास रखने वाले, देवताओं को यज्ञ में बुलाने वाले, यज्ञ को ठीक तरह ebook converter DEMO Watermarks*