श्रीमद्वाल्मीकीय रामायण

श्रीमद्वाल्मीकीय रामायण
Shrimad Valmiki Ramayana
महर्षि वाल्मीकि द्वारा
DevanagariHindipublished2,621 पृष्ठ
पृष्ठ 2442, कुल 2621 में से
संदर्भ में पढ़ेंपृष्ठ 2442
इस प्रकार कहते-कहते श्रीरघुनाथजीके दोनों नेत्र आँसुओंसे भर गये। फिर वे धर्मात्मा श्रीराम अपने भाइयोंके साथ महलमें चले गये। उस समय उनका हृदय शोकसे व्याकुल था और वे हाथीके समान लम्बी साँस खींच रहे थे॥ २४-२५ ॥
इस प्रकार श्रीवाल्मीकिनिर्मित आर्षरामायण आदिकाव्यके उत्तरकाण्डमें पैंतालीसवाँ सर्ग पूरा हुआ॥ ४५॥