श्वेताश्वतरोपनिषद् (शाङ्करभाष्य सहित)

श्वेताश्वतरोपनिषद् (शाङ्करभाष्य सहित)
Shvetashvatara Upanishad with Shankara Bhashya
आदि शङ्कराचार्य द्वारा
स्रोत: Gita Press Gorakhpur · Gita Press, Gorakhpur (उद्गम)
DevanagariSanskritpublished276 पृष्ठ
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( ८ ) और श्वेताश्वतर शेष थे। इनका अनुवाद भी समाप्त हो गया। प्रचलित क्रमके अनुसार पहले बृहदारण्यक प्रकाशित होना चाहिये था, परन्तु छोटा होनेके कारण पहले श्वेताश्वतरका अनुवाद किया गया और वही पहले प्रकाशित भी हो रहा है। बृहदारण्यककी छपाई भी आरम्भ हो गयी है, आशा है वह भी शीघ्र ही प्रकाशित हो जायगा। इस प्रकार अनुवादके ही बहाने जो यत्किञ्चित् सत्पुरुषोंकी सेवा और सद्ग्रन्थोंका मनन होता है, उससे किसी प्रकार भगवत्कृपाका पात्र बन सकूँ-ऐसा प्रेमी पाठक आशीर्वाद देनेकी कृपा करें। विनीत अनुवादक