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श्री रामकृष्ण वचनामृत (प्रथम भाग - सूर्यकान्त त्रिपाठी 'निराला' द्वारा अनूदित)

श्री रामकृष्ण वचनामृत (प्रथम भाग - सूर्यकान्त त्रिपाठी 'निराला' द्वारा अनूदित)

Sri Ramakrishna Vachanamrita (Part 1 - Tr. Nirala)

श्री 'म' (महेंद्रनाथ गुप्त) / सूर्यकान्त त्रिपाठी 'निराला' द्वारा

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परिच्छेद १४

सींती का ब्राह्मसमाज – शिवनाथ आदि ब्राह्मभक्तों के साथ वार्तालाप और आनन्द

(१)

उत्सवमन्दिर

भगवान् श्रीरामकृष्ण सींती का ब्राह्मसमाज देखने आए हैं। २८ अक्टूबर १८८२ ई., शनिवार, आश्विन की कृष्णा द्वितीया है।

आज यहाँ ब्राह्मसमाज के छठे महीने का उत्सव होगा। इसीलिए भगवान् श्रीरामकृष्ण को निमन्त्रण देकर बुलाया है। दिन के तीन-चार बजे का समय है, श्रीरामकृष्ण कुछ भक्तों के साथ गाड़ी पर चढ़कर दक्षिणेश्वर कालीमन्दिर से श्रीयुत वेणीमाधव पाल के मनोहर बगीचे में पहुँचे हैं। इसी बगीचे में ब्राह्मसमाज का अधिवेशन हुआ करता है। ब्राह्मसमाज को वे बहुत प्यार करते हैं। ब्राह्मभक्त भी उन्हें बड़ी श्रद्धाभक्ति से देखते हैं। अभी कल ही शुक्रवार के दिन, शाम को आप केशव सेन और भक्तों के साथ जहाज पर चढ़कर हवाखोरी को निकले थे।

सींती पाइकपाड़ा के पास है। कलकत्ते से तीन मील, उत्तर दिशा में। स्थान निर्जन और मनोहर है; ईश्वरोपासना के लिए अत्यन्त उपयोगी है। बगीचे के मालिक साल में दो बार उत्सव मनाते हैं; एक बार शरत्-काल में और एक बार वसन्त में। इस महोत्सव में वे कलकत्ते और सींती के आसपास के ग्रामवासी अनेक भक्तों को निमन्त्रण देते हैं। अतएव आज कलकत्ते से शिवनाथ आदि भक्त आए हैं। इनमें से अनेक प्रातःकाल की उपासना में सम्मिलित हुए थे। वे सब सायंकालीन उपासना की प्रतीक्षा कर रहे हैं। विशेषतः उन लोगों ने सुना है कि अपराह्न में महापुरुष का आगमन होगा, अतएव उनकी आनन्द-मूर्ति देखेंगे, उनका हृदयमुग्धकारी वचनामृत पान करेंगे, मधुर संकीर्तन सुनेंगे और देखेंगे भगवत्-प्रेममय देवदुर्लभ नृत्य।

दोपहर को बगीचे में आदमी ठसाठस भर गए हैं। कोई लतामण्डप की छाया में बेंच पर बैठा हुआ है, कोई सुन्दर तालाब के किनारे मित्रों के साथ घूम रहा है। कितने ही लोग

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