भारतकोश
स्वदेशी भारत एवं विदेशी कंपनियों का षड़यन्त्र

स्वदेशी भारत एवं विदेशी कंपनियों का षड़यन्त्र

Swadeshi Bharat evam Videshi Kampaniyon Ka Shadyantra

राजीव दीक्षित / रोबिन सिराना द्वारा

स्रोत: Swadeshi Bharat & Rajiv Dixit Lectures · Swadeshi Robin Sirana · 2017 (उद्गम)

DevanagariHindipublished77 पृष्ठ

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17 साल बराबर आता रहा, लूटता रहा इस देश को, एक ही मंदिर को, सोमनाथ का मंदिर जो वेंगवेल में है,

उस सोमनाथ के मंदिर को एक व्यक्ति, एक वर्ष आया अरबों चला गया, दूसरे साल आया, फिर गया, तीसरे साल आया, फिर लूट वो बराबर आता रहा, और लूट कर ले जाता रहा। तो वो टेक्स्ट भी उनको मिल गए थे कि एक-एक मंदिर में इतनी सम्पत्ति, इतनी पूंजी है, इतना पैसा है भारत में, तो चलो इस देश को लुटा जाए और उस ज़माने में एक जानकारी और दे दूँ, ये जो यूरोप वाले अमरीका वाले जितना अपने आप को विकसित कहे, सच्चाई ये है कि 14 वीं। और 15 वीं। शताब्दी में दुनिया में सबसे ज्यादा गरीबी यूरोप के देशों में थी, खाने पीने को भी कुछ होता नहीं था। प्रकृति ने उनको हमारी तरह कुछ भी नहीं दिया, न उनके पास नेचुरल रिसोर्सेस है, जितने हमारे पास है। न मौसम बहुत अच्छा है, न खेती बहुत अच्छी होती थी और उद्योगों का तो प्रश्न ही नहीं उठता। 13 वीं। और 14 वीं। शताब्दी में तो यूरोप में कोई उद्योग नहीं होता था, तो उनलोगों का मूलतः जीविका का जो साधन था जो वो लुटेरे बन के काम से जीविका चलाते थे, चोरी करते थे, डकैती करते थे, लूट डालते थे, ये मूल काम वाले यूरोप के लोग थे। तो उनको पता लगा कि हिंदुस्तान और भारतवर्ष में इतनी सम्पत्ति है तो उस देश को लूटा जाए, और वास्को डी गामा ने आ कर हिंदुस्तान में लूट का एक नया इतिहास शुरू किया।

महमूद गजनवी नाम का खरबों की सम्पत्ति ले कर अरबों खरबों की सम्पत्ति ले कर ले गया। और 17 साल

उससे पहले भी लूट चली हमारी, महमूद गजनवी जैसे लोग हमको लूटते रहे। लेकिन वास्को डी गामा ने आकर लूट को जिस तरह से केन्द्रित किया और ओर्गनाइजड किया वो समझने की जरूरत है, उसके पीछे पीछे क्या हुआ, पुर्तगाली लोग आए, उन्होंने 70-80 वर्षों तक इस देश को खूब जम कर लूटा। पुर्तगाली चले गए इस देश को लूटने के बाद, फिर उसके पीछे फ्रांसिसी आए, उन्होंने इस देश को खूब जमकर लुटा 70-80 वर्ष उन्होंने भी पुरे किए। उसके बाद डच आ गये हॉलैंड वाले, उन्होंने इस देश को लुटा, उसके बाद फिर अंग्रेज आ गए हिंदुस्तान में लूटने के लिए ही नहीं बल्कि इस देश पर राज्य भी करने के लिए, पुर्तगाली आए लूटने के लिए, फ्रांसिसी आए लूटने के लिए, डच आए लूटने के लिए, और फिर पीछे से अंग्रेज चले आए लूटने के लिए, अंग्रेजो ने लूट का तरीका बदल दिया। ये अंग्रेजो से पहले जो लूटने के लिए आए वो आर्मी ले कर के आए थे बंदूक ले कर के आये थे, तलवार ले के आए थे, और जबरदस्ती लूटते थे। अंग्रेजो ने क्या किया कि लूट का सिलसिला बदल दिया, और उन्होंने अपनी एक कंपनी बनाई, उसका नाम ईस्ट इंडिया रखा। ईस्ट इंडिया कंपनी को ले के सबसे पहले सुरत में आए इसी गुजरात में, ये बहुत बड़ा दुर्भाग्य है इस देश का कि जब जब इस देश की लूट हुई है इस देश की गुजरात के रास्ते हुई है।

जितने लोग इस देश को लूटने के लिए आए बाहर से वो गुजरात के रास्ते घुसे इस देश में, इसको समझिए क्यों ? क्योंकि गुजरात में सम्पत्ति बहुत थी, और आज भी है, तो अंग्रेजो को लगा कि सबसे

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