स्वदेशी उत्पाद बनाने की विधि (भाग 1)
Swadeshi Utpad Banane Ki Vidhi (Bhag 1)
by राजीव दीक्षित / रोबिन सिराना
Source: Swadeshi Utpad Series Part 1 · Swadeshi Robin Sirana · 2017 (origin)
11/19/2017
श्री राजीव दीक्षित जी
स्वदेशी उत्पाद कैसे बनाएं..
स्वदेशी अपनाएं देश बचाएं | स्वदेशी क्रान्तिकारी रोबिन सिराना
आजादी बचाओ आन्दोलन आज एक नई भूमिका में आपके सामने हैं। अभी तक तो आंदोलन केवल विदेशी सामानों के बहिष्कार की बात करता था। लेकिन अब स्वदेशी सामानों को बनाने वाले उत्पादकों की फौज खड़ी करने का काम भी शुरू कर रहा है।
आन्दोलन की इस नई दिशा की शुरुआत के लिए ‘स्वानंद अनुसंधान पीठम्’ ने पृष्ठभूमि तैयार की है। ‘स्वानंद’ एक ट्रेड मार्क है जो स्वदेशी उत्पादों को उनकी गुणवत्ता के लिए दिया जाता है। यह अपने आप में अनोखा ट्रेड मार्क है, जो यह बताता है कि कौन सा सामान स्वदेशी और गुणवत्ता वाला है।
स्वदेशी उत्पादों को बनाने के फार्मूलों की किताब बनाने का विचार काफ़ई पहले से हम लोगो के दिमाग में घूम रहा था। लेकिन उसे साकार रूप देने के लिए श्री शान्ति भाई ठक्कर ने पहल की। आंदोलन के वरिष्ठ साथी श्री संत समीर जी ने इस किताब के निर्माण और संयोजन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
इस किताब को प्रकाशित करने का उद्देश्य देश भर में, विशेष कर गाँवों में फैली बेरोजगारी को राष्ट्रहित के लिए तैयार करना है। हमें उम्मीद है कि इस किताब के माध्यम से न केवल लोगों को रोजगार मिलेगा, बल्कि देश में बेरोजगारी की वजह से बढ़ रहे अत्याचार, लूटखोरी, हिंसा आदि पर भी काबू पाया जा सकता है।
- राजीव दीक्षित
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इस पुस्तिका के लिखने के पीछे उद्देश्य यह रहा है कि लोग अपनी जरूरत की अधिकांश वस्तुएं अपने घर में ही बना सकें या चाहें तो थोड़ी सी पूँजी लगाकर अपना उद्योग-धन्धा शुरू कर सकें और स्वावलंबी बनें। मेरी उत्कृष्ट इच्छा है कि भारत की धरती से बहुराष्ट्रीय कंपनियों का साम्राज्य नेस्तनाबूद हो और यह देश स्वावलंबी और उद्योगी राष्ट्र बनकर एक बार फिर से सारे संसार का सरताज बने। परंतु यह तभी हो सकता है जबकि हम लोग विदेशी सामानों के मोहपाश से छूटकर अपने जीवन में स्वदेशी अपनाने का संकल्प धारण करें।
आज इस देश में बेरोजगारों की एक विशालकाय फौज खड़ी हो गई है। यह हरकत में आएगी तो देश का ही विनाश करेगी। सरकारों के पास इस समस्या का कोई समाधान नहीं है। वे समाधान के प्रति ईमानदार भी नहीं हैं, क्योंकि बेरोजगारी जैसे मुद्दे के सहारे उनकी राजनीति सधती है। ऐसे में देश के बेरोजगार युवकों से मेरी अपील यही है कि वे नौकरियों के पीछ बहुत समय न गँवाते हुए स्वदेशी उद्योग-धन्धे खड़े करने के काम में लगे तो उनका और राष्ट्र, दोनों का भला होगा। इस देश में स्वावलम्बन की अपार संभावनाएं हैं। प्राकृतिक संसाधनों की भरभार है व पेड़-पौधों, जीव-जन्तुओं, फसलों की विविधताएं हैं, खनिज संसाधन हैं, काम करने वाले अनगिनत हाथ हैं, और असली बात यह है कि हमारे देश में प्रतिभा है। जरूरत सिर्फ दृढ़ संकल्प जगाने की है, हम बहुत कुछ कर सकते हैं। सचमुच आज देश में स्वदेशी व्यवस्था कायम करने की महती आवश्यकता है, अन्यथा, बहुराष्ट्रीय कंपनियों की खतरनाक किस्म की आर्थिक गुलामी से हम बच नहीं पाएंगे।
- शांति लाल ठक्कर
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विषय सूची
| उत्पाद | पेज न. |
|---|---|
| 1. नहाने का साबुन | 7 |
| 2. नहाने का हर्बल साबुन | 10 |
| 3. नहाने का गोमय साबुन | 10 |
| 4. कपड़ा का साबुन (ठण्डी विधि) | 12 |
| 5. कपड़ा का साबुन (गर्म विधि) | 14 |
| 6. डिटर्जेंट केक | 15 |
| 7. डिटर्जेंट पाउडर | 19 |
| 8. वाशिंग पाउडर (पीला) | 17 |
| 9. डिटर्जेंट पाउडर (हाई पावर) | 20 |
| 10. लिक्विड सोप | 21 |
| 11. बर्तन धोने का पाउडर | 23 |
| 12. शैम्पू | 24 |
| 13. हर्बल शैम्पू | 24 |
| 14. कामधुने दंतमंजन | 25 |
| 15. हर्बल दंतमंजन | 26 |
| 16. दंतमंजन (सफेद) | 27 |
| 17. दंतमंजन (काला) | 28 |
| 18. टूथपेस्ट | 28 |
| 19. लैट्रिन एसिड | 29 |
| 20. फिनाइल | 30 |
| 21. नील (पाउडर) | 31 |
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- | नील (लिकिवड) | 31 ---|---|---
- | विशेष सुगन्धित अगरबती | 31
- | शाकल्य अगरबती | 33
- | चन्दन अगरबती | 34
- | साधारण अगरबती | 35
- | अमृतधारा | 36
- | स्नो | 37
- | टेलकम पाउडर | 37
- | कुकुम | 38
- | नेल पॉलिश | 38
- | गीला कुकुम (गंध कुकुम) | 38
- | चाय मसाला | 39
- | विक्स | 39
- | बाम | 40
- | कफ सीरप | 40
- | सर्दी, कफ, खाँसी के लिए स्पेशल काढ़ा (सीरप) | 41
- | वातनाशक तेल | 41
- | बिवाई मलहम | 42
- | स्याही | 42
- | स्टाम्प पैड की स्याही | 43
- | चॉकलेट | 43
- | पिपरमिंट गोलियाँ | 44
- | पुदीन गोलियाँ | 44
- | पैट्रोलियम जैली | 45
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| 46. | बगैर चिकनाहट की सफेद पैट्रोलियम जैली | 45 |
|---|---|---|
| 47. | कैस्टर ऑयल साफ करने की विधि | 46 |
| 48. | खोपरा तेल (पैराशूट आदि) | 46 |
| 49. | मोटर ग्रीस (बाल बियरिंग ग्रीस) | 47 |
| 50. | येलोकब ग्रीस | 48 |
| 51. | फर्नीचर पॉलिश | 48 |
| 52. | एम्बोसिंग कलर | 49 |
| 53. | आयल बाण्ड डिस्टेम्बर | 50 |
| 54. | आयल पेण्ट | 50 |
| 55. | रेड आक्साइड प्राइमर | 51 |
| 56. | लकड़ी का प्राइमर | 52 |
| 57. | चूने का छल्ला | 52 |
| 58. | पान मसाला | 53 |
| 59. | पान चटनी | 53 |
| 60. | सॉफ नमकीन | 54 |
| 61. | गुलकंद | 55 |
| 62. | बूट पॉलिश | 55 |
| 63. | बूट पॉलिश लिक्विड | 56 |
| 64. | गोंद बोतल | 57 |
| 65. | सफेद गोंद | 58 |
| 66. | वाटर प्रूफिंग सीमेण्ट | 58 |
| 67. | उदरशोधन चूर्ण | 59 |
| 68. | पोटीन (पुट्टी) | 60 |
| 69. | लिक्विड कोलतार | 61 |
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- | पेण्ट में डालने का टर्पेण्टाइन | 61 ---|---|---
- | डबर रोटी (ब्रेड) | 61
- | केक | 63
- | बिस्कुट (मीठे, कोकोनट, नमकीन) | 65
- | नान खटाई | 67
- | मोमबत्ती | 69
नहाने का साबुन
फार्मूला - 1
सामग्री -
| 1. नारियल तेल (खुला) | - | 1 किलो ग्राम |
|---|---|---|
| 2. कास्टिक पोटश | - | 250 ग्राम |
| 3. चने का बेसन | - | 250 ग्राम |
| 4. पानी | - | 1 लीटर |
| 5. रंग (तेल में घुलने वाला) | - | 2 ग्राम (1 चुटकी) |
| 6. सेंट (इच्छानुसार) | - | आवश्यकतानुसार |
विधि -
- प्लास्टिक के बर्तन में 1 लीटर पानी में 250 ग्राम कास्टिक पोटश डालकर लकड़ी से अच्छी तरह चलाकर घोले। इस घोल को लेई कहते हैं। इस घोल को 5-6 घंटे डिस्चार्ज (ठण्डा) होने के लिए छोड़ दें।
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- 2. दूसरे बर्तन में 1 किलो तेल 250 ग्राम बेसन डालकर अच्छी तरह मिलाए, ताकि तनिक भी गाँठ न रहे।
- 3. 5-6 घण्टे तक ठण्डा हो जाने पर कास्टिक पोटैश के घोल की धीरे-धीरे तेल बेसन के घोल में डालकर लकड़ी के डंडे से मिलाकर तेजी से घुटाई करते जाएं। यह घोल धीरे-धीरे गाढ़े पेस्ट में बदलता जाएगा। घुटाई सामान्यतः 4-5 मिनट तक की जाए। जितनी घुटाई की जाएगी, उतना ही अच्छा साबुन बनेगा। यह कार्य 2 व्यक्ति मिलकर अच्छा तरह कर सकते हैं।
- 4. साबुन पेस्ट को अब लकड़ी के साँचे अथवा बर्तन में जिसमें साबुन को जमाना है, भर दें तथा 10-12 घण्टे के लिए छोड़ दें। जमने के बाद निर्धारित साईज की टिकिया बनाएं और पैकिंग करें।
फार्मूला 2
सामग्री -
| 1. सोयाबीन तेल | - | 500 ग्राम |
|---|---|---|
| 2. नारियल तेल | - | 500 ग्राम |
| 3. कास्टिक सोडा | - | 100 ग्राम |
| 4. घुलनशील रंग | - | आवश्यकतानुसार |
| 5. ग्लिसरीन | - | 10 ग्राम |
| 6. सुगंध | - | 5 ग्राम |
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विधि -
- 1. सबसे पहले सोयाबीन व नारियल के तेल को एक में मिलाकर कड़ाही में गुनगना गरम करें।
- 2. इसके बाद 1 ली. पानी में कास्टिक सोडा मिलाकर इसे तेल में मिलाते हुए घोंटते जाएं। पानी ज्यादा हो तो नमक का छिड़काव करें, इससे साबुन पेस्ट और पानी अलग-अलग हो जाएंगे।
- 3. साबुन पेस्ट अलग निकालकर इसमें रंग, ग्लिसरीन व सुगंध मिलाकर प्लास्टिक डिब्बे में रख दें। तीन दिन में साबुन जम जाएगा।
- 4. अब तार से कटिंग करके डार्ड के जरिए मनचाहा आकार दीजिए।
सावधानियाँ -
- 1. कास्टिक पोटैश अथवा इसके घोल को हाथ से न छुएं।
- 2. कास्टिक पोटैश को खुला न छोड़ें।
- 3. एल्युमीनियम या अन्य धातु के बर्तन का प्रयोग न करें।
कास्टिक पोटैश के घोल को कम से कम 5-6 घण्टे ठण्डा होने के बाद ही बेसन के घोल में साबुन बनाने हेतु मिलाएं। गर्म में मिलाने से घोल फट सकता है और साबुन खराब हो सकता है। जमने में भी दिक्कत हो सकती है।
- 4. यदि कास्टिक पोटैश उपलब्ध नहीं होता है तो इसके स्थान पर 175 ग्राम से 200 ग्राम तक कास्टिक सोडा भी इस्तेमाल किया जा सकता है। ऐसी स्थिति में 50 ग्राम ग्लिसरीन भी इस्तेमाल की जाती है। गाढ़ा पेस्ट बन जाने पर ग्लिसरीन धार से डालकर पेस्ट में मिक्स की जाती है।
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नहाने का गोमय साबुन
सामग्री -
| 1. नीम तेल | - | 20 किलो |
|---|---|---|
| 2. खोपरा तेल | - | 1 किलो |
| 3. मुल्तानी मिट्टी | - | 16 किलो |
| 4. गेरू | - | 4 किलो |
| 5. कास्टिक सोडा | - | 2 किलो |
| 6. सिलीकेट | - | 8 किलो |
| 7. गौमूत्र तथा गोबर रस - | 20 किलो |
विधि -
- 1. सर्वप्रथम नीम तथा खोपरे का तेल गुनगुना गर्म करें।
- 2. अब इसमें थोड़ी - थोड़ी मात्रा में कास्टिक सोडा डालते हुए घोंटते जाइए।
- 3. इसके बाद इसमें गौमूत्र तथा गोबर का रस मिलाकर मुल्तानी मिट्टी व गेरू पाउडर मिलाइए।
- 4. सबस अंत में सिलीकेट मिलाकर अलग बर्तनों में जमा दीजिए।
- 5. साबुन जम जाने पर तार से कटिंग करके पैकिंग कर लें। यह त्वचा के लिए बहुत ही उम्दा साबुन है।
नहाने का हर्बल साबुन
सामग्री -
| 1. मुल्तानी मिट्टी | - | 1 किलोग्राम |
|---|
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| 2. आँवला (सूखा) | - | 100 ग्राम |
|---|---|---|
| 3. नीम की हरी पतियाँ | - | 100 ग्राम |
| 4. दही का मट्ठा | - | 250 ग्राम |
| 5. नींबू का रस | - | 100 ग्राम |
| 6. रीठा | - | 50 ग्राम |
| 7. हल्दी | - | 25 ग्राम |
| 8. सुंगंध | - | इच्छानुसार |
विधि -
- 1. मुल्तानी मिट्टी को इमामदस्ते में बारीक कूटकर छान लें।
- 2. 100 ग्राम नीम की पत्ती को 500 ग्राम पानी में उबालकर छान लें ताकि लगभग 400 ग्राम पानी प्राप्त हो जाये।
- 3. 100 ग्राम आँवले को तैयार नीम के पानी में 12 घण्टे भिगोकर रख दें। तत्पश्चात् अच्छी तरह मथकर तथा छानकर आँवला पानी तैयार करें।
- 4. 50 ग्राम रीठा को 100 ग्राम पानी में 12 घण्टे भिगोकर रख दें। तत्पश्चात् अच्छी तरह मथकर तथा छानकर रीठा झाग पानी तैयार करें।
- 5. आँवले के पानी, रीठा झाग पानी को एक जगह मिला दें। इस घोल में मट्ठा (अच्छई तरह मथी हुई दही) तथा हल्दी को डालकर अच्छी तरह मिला दें।
- 6. तैयार घोल को मुल्तानी मिट्टी के साथ गूँथकर रख दें। 4-5 घण्टे बाद मिट्टी में 100 ग्राम नींबू का रस तथा रुचि के अनुसार सुगंधि डालकर पुनः अच्छी तरह गुँथाई करें।
- 7. उपरोक्त तैयार सामग्री साँचे में डालकर अथवा हाथ से साबुन सूखने में मौसम के अनुसार 3 से 6 दिन तक लग जाता है।
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8. अच्छी तरह सूख जाने पर पैकिंग करें।
कपड़ा धोने का साबुन (ठण्डी विधि)
सामग्री -
| 1. आखादय तेल (जमने वाला तेल) | - | 1 किलो |
|---|---|---|
| 2. कास्टिक सोडा | - | 250 ग्राम |
| 3. कपड़ा धोने का सोडा | - | 250 ग्राम |
| 4. मैदा/बेसन/आटा/सबका मिश्रण | - | 500 ग्राम |
| 5. पानी | - | 3 लीटर |
विधि -
- 1. कपड़ा धोने का साबुन जमने वाले तेल से बनाया जाता है। जमने वाले तेल को ठण्डा तेल भी कहते हैं। नीम, महुआ, अरंडी, धान, साल आदि अखादय जमने वाले तेल हैं, जिनका प्रयोग सामान्यतः साबुन बनाने में किया जाता है।
- 2. 1.5 लीटर पानी बाल्टी एक में लेकर उसमें 500 ग्राम आटा/बेसन/मैदा (जो भी प्रयोग करना है) को अच्छी तरह घोल लें, ताकि गुठली न रह जाय।
- 3. दूसरी प्लास्टिक बाल्टी में 1.5 लीटर पानी लेकर 250 ग्राम कास्टिक सोडा डालें और डंडे से चलाए। घुलने के बाद 250 ग्राम कपड़ा धोने का सोडा भी डाल दें और लकड़ी से ही मिलाएं। अब इसमें 1 किलो तेल एक साथ डाल दें और तुरंत ही एक नंबर की बाल्टी की सामग्री भी एक साथ डाल दें। साथ ही लकड़ी के गोल डण्डे से तेजी से घुटाई करते जाएं।
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घुटाई सामान्यतः 5 मिनट तक की जाए। इतने समय में ही कास्टिक की गंध आने लगेगी, तब घुटाई बंद कर दें।
- 4. बाल्टी से इस सामग्री को जिस बर्तन(सामान्यतः चौकोर/गोल प्लास्टिक टब अथवा ट्रे) में जमाना है, उलट दें तथा 14-15 घण्टे जमने के लिए छोड़ दें। इसके बाद इच्छानुसार आकार की बट्टियाँ काट लें तथा पैकिंग कर दें।
सावधानियाँ -
- 1. एल्युमीनियम या अन्य धातु की बाल्टी का प्रयोग किसी भी स्थिति में न करें।
- 2. कास्टिक सोडा को खुला न छोड़े, अन्यथा वातावरण की नमी सोखकर पानी बन जाएगा।
- 3. कास्टिक सोडा अथवा उसके घोल को हाथ से न छुएं।
- 4. सोडा बाल्टी में तेल डालने के साथ ही आटे का घोल डालें, यदि आटा घोल डालने में देरी हुई तो आटे का घोल फट जाएगा।
- 5. बाल्टी नं. 1 एवं 2 की सामग्री की लुगदी बनाने हेतु घुटाई कास्टिक सोडा की गंध आने तक ही की जाय। अधिक घुटाई करने पर लुगदी तेल छोड़ देगी और जमेगा नहीं।
सामान्यतः वजन बढ़ाने तथा साबुन में कडापन लाने के लिए डोलामाइट/स्टोन पाउडर का प्रयोग किया जाता है, परन्तु इससे साबुन की क्वालिटी अच्छी नहीं होती। अनुभव से यह पाया गया है कि आटा या बेसन डालने से कई लाभ होते हैं। इससे ठोसपन व वजन बढ़ने के साथ-साथ साबुन
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हाथ नहीं काटता, मैल अच्छी तरह हटाता है और कपड़े में कलफ का काम भी करता है।
अनुभव से यह भी पाया गया है कि ताजा बना हुआ साबुन मैल तो काटता है पर झाग कम देता है। दही साबुन 5-10 दिन के बाद मैल काटने के साथ-साथ झाग भी अच्छा देता है।
(5) कपड़े धोने का साबुन (गर्म विधि)
सामग्री -
| 1. | सोयाबीन तेल | - | 500 ग्राम |
|---|---|---|---|
| 2. | खोपरे का तेल | - | 50 ग्राम |
| 3. | सिलीकेट | - | 500 ग्राम |
| 4. | कास्टिक सोडा | - | 100 ग्राम |
विधि -
- 1. सर्वप्रथम दोनों तेल एक जगह मिलाकर गुनगुना करें।
- 2. इसके बाद एक लीटर पानी में कास्टिक सोडा मिलाकर इसे तेल में मिलाते हुए घोटते जाएं।
- 3. एकरस होने के बाद यदि पानी ज्यादा हो तो नमक का छिड़काव करें, इससे पानी अलग हो जाएगा।
- 4. अब साबुन अलग कड़ाही में निकालकर, इसमें सिलीकेट मिलाकर खूब घोंटे।
- 5. इसे प्लास्टिक डिब्बे में जमा दे तथा तीन दिन बाद कटिंग करिए व मनचाहा आकार दे दीजिए।
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सूचना - अगर साबुन कडा हो जाए तो सिलीकेट मिट्टी कम डालें।
सावधानियाँ -
- 1. प्लास्टिक की बाल्टी का प्रयोग किसी भी स्थिति में न करें।
- 2. कास्टिक सोडा को खुला न छोड़े, अन्यथा वातावरण की नमी सोखकर पानी बन जाएगा।
- 3. कास्टिक सोडा अथवा उसके घोल को हाथ से न छुएं।
(6) डिटर्जेंट केक
फार्मूला - 1
सामग्री -
| 1. सोपस्टोन पाउडर | - | 10 किलो |
|---|---|---|
| 2. स्लॉरी | - | 1 किलो |
| 3. चूना पाउडर | - | 500 ग्राम |
| 4. बोरेक्स (सुहागी) | - | 500 ग्राम |
| 5. यूरिया | - | 100 ग्राम |
| 6. सोडियम लारेल सल्फेट | - | 50 ग्राम |
| 7. नीला कलर | - | 10 ग्राम |
विधि -
- 1. सर्वप्रथम एक प्लास्टिक टब या बाल्टी में पानी लेकर उसमें सभी सामग्री लकड़ी के डंडे से अच्छी तरह हिलाकर 3 घण्टे वैसे ही रखें,
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और उसमें पानी डालकर आटे की तरह मांड़े। जरूरत हो तो किंचित पानी मिला लें।
- 2. लगभग आधा घण्टा तक अच्छी तरह हिलाते रहने से इसमें गाढ़ापन आने लगेगा, तब इसमें रंग (कलर) व इत्र मिलाकर प्लास्टिक ट्रे में उडेल दें।
- 3. 24 घण्टे बाद जैसी चाहें वैसी टिकिया काट लें। घर में इस्तेमाल करना हो तो प्लास्टिक कागज पर फैलाएं। बट्टी तैयार है। बिक्री करनी हो तो डाई में जमाए। इस तरह के कामों में हाथों में प्लास्टिक के दस्ताने जरूर पहनें।
फार्मूला - 2
सामग्री -
| 1. पाम तेल | - | 1 किलो |
|---|---|---|
| 2. पानी | - | 1 किलो |
| 3. कास्टिक सोडा | - | 250 ग्राम |
| 4. सोडा ऐश | - | 100 ग्राम |
| 5. ट्राय सोडियम पाली सल्फेट | - | 100 ग्राम |
| 6. अन आयोनीक डिटरजेंट | - | 50 ग्राम |
| 7. सोपस्टोन पाउडर | - | 250 ग्राम |
| 8. फोम बुस्टर लिक्विड | - | 200 ग्राम |
| 9. सोडियम सिलीकेट | - | 500 ग्राम |
| 10. ऑप्टीकर ब्राइटनर | - | 25 ग्राम |
| 11. कलर | - | आवश्यकतानुसार |
| 12. सेण्ट | - | आवश्यकतानुसार |
| 13. बोरेक्स | - | 50 ग्राम |
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विधि -
- 1. सर्वप्रथम एक प्लास्टिक टब या बाल्टी में 1 लीटर पानी लेकर उसमें कास्टिक, सोडा ऐश, सोडियम सिलीकेट, ट्राय सोडियम पाली सल्फेट तथा बोरेक्स मिलाकर इस लकड़ी के डंडे से अच्छी तरह हिलाकर 3 घण्टे वैसे ही रखें।
- 2. दूसरे प्लास्टिक टब या बाल्टी में 1 किलो पाम तेल लेकर उसमें सोप स्टोन पाउडर, ऑप्टीकर ब्राइटनर मिलाकर अच्छी तरह घोंटकर मिलाइए।
- 3. क्रमांक 2 के तेल में क्रमांक 1 की सामग्री धीरे-धीरे मिलाइए। साथ ही इसमें फोम बुस्टर लिक्विड तथा अन आयोनीक डिटरजेंट मिला दीजिए।
- 4. लगभग आधा घण्टा तक अच्छी तरह हिलाते रहने से इसमें गाढ़ापन आने लगेगा, तब इसमें रंग (कलर) व इत्रा मिलाकर प्लास्टिक ट्रे में उड़ेल दें।
- 5. 24 घण्टे बाद जैसी चाहें वैसी टिकिया काट लें।
सावधानी -
इस पूरी निर्माण विधि में एल्युमीनियम के बर्तनों का इस्तेमाल न करें।
(7) वाशिक पाउडर (पीला)
सामग्री -
- 1. कपड़ा धोने का सोडा - 1 किलो
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| 2. नमक | - | 200 ग्राम |
|---|---|---|
| 3. यूरिया | - | 5 ग्राम |
| 4. मैदा | - | 50 ग्राम |
| 5. स्लरी | - | 200 मि.ली. |
| 6. रंग | - | 5 ग्राम |
| 7. पानी | - | 100 मि.ली |
विधि -
- प्लास्टिक सीट को फर्श पर बिछा लें। सोडे को प्लास्टिक पर छान लें। तत्पश्चात् बारीक पिसे हुए यूरिया, नमक व मैदा को भई एक-एक कर सोडा के ऊपर छान लें। इन सबको अच्छी तरह एक साथ मिला लें।
- 100 मि. लीटर पानी बाल्टी में लें, इसमें 5 ग्राम रंग अच्छई तरह घोल लें।
- अब एक व्यक्ति पतली धार से स्लरी धीरे-धीरे बाल्टी में डालता जाए
- तथा दूसरा डण्डे से अच्छई तरह चलाता रहे। डण्डे से अच्छई तरह चलाते रहने व घुटाई करने से यह लेई की तरह लुगदी बन जाएगा।
- लुगदी बन जाने पर इसमें सोडा के साथ बनाया हुआ मिश्रण थोड़ा-थोड़ा डालकर (50-100 ग्राम) डण्डे से अच्छी तरह मिलाते जाएं जब तक सारी नमी सोखकर ठोस गीला पाउडर के रूप में न जाए। मिलाने के दौरान तेज रासायनिक प्रक्रिया होती है और उसमें गर्मी निकलती है, अतः हाथ से न छुएं। बाल्टी में तैयार मिश्रण को प्लास्टिक सीट पर रखे हुए सोडा मिश्रण में डालें तथा दोनों हाथ से अच्छी तरह रगड़-रगड़ कर मिकिसंग करें ताकि कोई रोड़ी न रहने पाए। जितना अच्छा मिकिसंग होगा, उतनी
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ही अच्छी क्वालिटी का माल तैयार होगा। इसे छान लें और यदि रोडी ऊपर रह जाती है तो उसे फिर रगड़कर मिल्स करें।
6. इस प्रकार अच्छई तरह समान रूप से छने हुए पाउडर को इच्छानुसार तौल के अनुरूप प्लास्टिक की थैलियों में पैक करें।
उपकरण -
- 1. बिछावन के लिए प्लास्टिक सीट
- 2. प्लास्टिक बाल्टी
- 3. लकड़ी का गोल डण्डा 2 - 2.5 फिट लंबा
- 4. तराजू - बाट
- 5. आटा छानने की छलनी
- 6. सिलिंग मशीन या स्टेप्लर
सावधानियाँ -
- 1. एसिड स्लरी, रंग व पानी से बने हुए पेस्ट तथा रासायनिक क्रिया के दौरान मिक्सर (मिश्रण) को हाथ से न छुएं।
- 2. तेल में घुलने वाला रंग ही प्रयोग करें, रंग अच्छी क्वालिटी का हो।
- 3. 10 किलो से अधिक पाउडर तैयार करने के लिए हाथ में दस्ताने पहन लेना ज्यादा अच्छा है।
- 4. पाउडर को रगड़कर मिक्सिंग करने के लिए विशेष ध्यान दें।
(8) डिटर्जेंट पाउडर
सामग्री -
| 1. कपड़े धोने का सोड़ा | - | 10 किलो |
|---|---|---|
| 2. चूना पाउडर | - | 500 ग्राम |
| 3. स्लॉरी | - | 1 किलो |
| 4. बोरेक्स पाउडर | - | 250 ग्राम |
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5. नीला कलर
10 ग्राम
विधि -
- 1. इन सारी चीजों को प्लास्टिक कागज पर अच्छी तरह मिलाकर रगड़िए।
- 2. अब इसमें कलर और बोरेक्स पाउडर मिलाकर रगड़िए।
- 3. सुगंध के लिए सेंटोनिला 10 ग्राम डालकर पैकिंग करें।
सावधानियाँ -
- 1. पाउडर रगड़ते समय हाथ में प्लास्टिक के दस्ताने पहनने चाहिए।
- 2. पाउडर को रगड़कर मिक्सिंग करने के लिए विशेष ध्यान दें।
- 3. एसिड स्लरी, रंग व पानी से बने हुए पेस्ट तथा रासायनिक क्रिया के दौरान मिश्रण को हाथ से न छुएं।
(9) डिटर्जेंट पाउडर (हार्ड पावर)
सामग्री -
| 1. सोडा ऐश | - | 2 किलो |
|---|---|---|
| 2. सोडियम बाय कार्बोनेट | - | 500 ग्राम |
| 3. सोडियम मॅटा सिलीकेट | - | 500 ग्राम |
| 4. सोडियम सल्फेट | - | 500 ग्राम |
| 5. एसिड स्लॉरी | - | 700 ग्राम |
| 6. लिक्विड फोम बुस्टर | - | 200 ग्राम |
| 7. कारबोक्सी मॅथिल सेल्यूलोज | - | 50 ग्राम |
| 8. ऑप्टीकर ब्राइटनर | - | 25 ग्राम |
| 9. ट्राय सोडियम फास्फेट | - | 250 ग्राम |
| 10. ट्राय सोडियम पॉली फास्फेट | - | 250 ग्राम |
| 11. बोरेक्स | - | 100 ग्राम |
| 12. सोडियम लारेल सल्फेट | - | 25 ग्राम |
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